चिराग ने एनडीए में ‘आग’ लगा दी, सीट बंटवारे से बौखलाए नीतीश
पटना: बिहार में एनडीए गठबंधन के भीतर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान के बीच सीटों को लेकर खुला संघर्ष सामने आया है। गठबंधन में सहयोग और समन्वय की जो भावना बनी थी, वह चिराग की जिद की वजह से अब खत्म होने के कगार पर है। एनडीए के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
नीतीश कुमार ने जताई नाराजगी
नीतीश कुमार ने सीधे तौर पर भाजपा या अन्य सहयोगी दलों पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने जदयू के उन नेताओं को तलब किया, जो सीट शेयरिंग में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने कड़े शब्दों में पूछा:
“जदयू की जीती हुई और परम्परागत सीटें कैसे दूसरे दलों को देने की बात तय हो गई? इसे ठीक कराइए, फिर बात कीजिए।”
इस विवाद के कारण सोमवार को एनडीए की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी रद्द करनी पड़ी।
चिराग पासवान की दावेदारी और गठबंधन पर असर
चिराग पासवान को 29 सीटें मिलने के बाद भी विवाद इस बात पर बढ़ गया कि वे जदयू की चार परम्परागत सीटों पर भी दावा कर रहे हैं। उन्होंने बिना समन्वय के उम्मीदवार तय कर दिए। जदयू इसे अपनी जीत और परम्परा की अनदेखी मान रहा है।
घटल दलों का कहना है कि चिराग सहयोगी दलों की सीटों पर दावेदारी कर गठबंधन को कमजोर कर रहे हैं। उपेन्द्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी भी चिराग को अधिक तवज्जो दिए जाने से नाराज हैं।
प्रमुख सीटों पर टकराव
सोनबरसा: जदयू के विधायक रत्नेश सदा की परम्परागत सीट पर चिराग ने रीना पासवान को उम्मीदवार बनाने का संकेत दिया। नीतीश कुमार ने रत्नेश सदा को सिम्बल भी दे दिया है।
राजगीर: जदयू के कौशल किशोर की सुरक्षित सीट पर चिराग ने प्रत्याशी चयन कर दिया।
तारापुर: 2020 में जदयू के राजीव कुमार सिंह ने चुनाव जीता था। चिराग ने यहां भी दावा कर दिया।
मोरवा, हिलसा और मखदुमपुर: जदयू और ‘हम’ पार्टी की परम्परागत सीटों पर चिराग ने उम्मीदवार तय कर विवाद बढ़ा दिया।
गठबंधन में सहयोगी दलों की नाराजगी
घटक दल अब अंदर ही अंदर भाजपा और चिराग की कार्रवाई से नाराज हैं। उनका कहना है कि वे चिराग के बिना भी जीत दर्ज कर सकते हैं, फिर इतनी मान-मनौव्वल की क्या जरूरत है। घटल दलों की नाराजगी अब खुलकर सामने आ रही है।
एनडीए का भविष्य सवालों के घेरे में
नीतीश कुमार के सख्त रुख और चिराग की जिद के बीच एनडीए में टकराव बढ़ रहा है। अब यह देखना होगा कि क्या यह केवल सीट विवाद तक सीमित रहेगा या गठबंधन पर स्थायी असर डालेगा।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर चिराग अपने दावे पर अड़े रहे, तो बिहार में चुनाव से पहले एनडीए की ताकत पर असर पड़ सकता है।
Author: Bharat Kranti News
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