“थोड़ी देर में आ रहा हूं…” कहकर निकला था गुलफाम, पेड़ से झूलता मिला शव; पांच मासूम अनाथ

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थोड़ी देर में आ रहा हूं…” कहकर गया था गुलफाम, अमरूद के पेड़ पर झूलता मिला शव; पांच मासूमों पर टूटा दुखों का पहाड़

सरधना (मेरठ), भारत क्रांति न्यूज़
“थोड़ी देर में आ रहा हूं…” — एक सीधी-सादी बात, जो आमतौर पर हर दिन लाखों लोग अपने अपनों से कहते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना कस्बे में रहने वाले 30 वर्षीय गुलफाम के इन आखिरी शब्दों ने उसके पांच मासूम बच्चों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।

शुक्रवार की दोपहर गुलफाम अपने दो बेटों को साथ लेकर पशुओं के लिए चारा लेने निकला था। बच्चों को बगीचे में छोड़कर वह यह कहकर गया कि वह पानी पीकर आता है। मगर कुछ देर बाद ही बच्चों ने अपने पिता को उसी बाग में एक अमरूद के पेड़ से फांसी पर लटका पाया। यह दृश्य इतना भयावह और पीड़ादायक था कि मासूम बच्चों की चीखें सुनकर खेतों में काम कर रहे ग्रामीण दौड़ पड़े।


घटना की डिटेल्स: क्या हुआ उस दोपहर?

  • गुलफाम, पुत्र जब्बार, हर्रा कस्बे का निवासी था।

  • शुक्रवार को दोपहर लगभग 3 बजे अपने बेटों अनस (6) और आहद (8) के साथ पशुओं का चारा लेने खेतों में गया था।

  • हर्रा–पांचली बुजुर्ग संपर्क मार्ग के पास स्थित एक बाग में बच्चों को बैठाकर खुद बगल के नलकूप की तरफ पानी पीने चला गया।

  • जब वह काफी देर तक नहीं लौटा, तो बच्चों ने उसकी तलाश शुरू की।

  • पास के खेत में स्थित एक अमरूद के पेड़ पर जब उन्होंने अपने पिता को लटका देखा, तो दोनों चीख पड़े।

  • बच्चों की आवाज़ सुनकर आस-पास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण मौके पर पहुंचे।


“मां तो पहले ही चली गई थी, अब अब्बू भी चले गए” — मासूमों की टूटी दुनिया

गुलफाम की पत्नी फातिमा की मौत ठीक एक साल पहले बेटी अलशिफा के जन्म के दौरान हो गई थी। तभी से गुलफाम अकेले ही अपने पांच छोटे बच्चों की परवरिश कर रहा था।
परिजनों और पड़ोसियों के मुताबिक, वह पत्नी की मौत के बाद से ही अवसाद (डिप्रेशन) में रहने लगा था। चुप-चुप रहना, काम में ध्यान न लगना और बच्चों के लिए चिंता करते रहना — यह उसकी दिनचर्या बन गई थी।

अब जब गुलफाम भी चला गया, तो बच्चे पूरी तरह अनाथ हो गए हैं।


गुलफाम के परिवार की स्थिति

नाम उम्र रिश्ता
आहद 8 वर्ष बेटा
अनस 6 वर्ष बेटा
जिया 4 वर्ष बेटी
कासिफा 3 वर्ष बेटी
अलशिफा 1 वर्ष बेटी
फातिमा पत्नी (मृत, 1 साल पूर्व)

पुलिस जांच और कार्रवाई

मौके पर पहुंची पुलिस ने पहले तो शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने का प्रयास किया, लेकिन परिजन पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर रहे थे।
बाद में, सीओ सरधना संजय कुमार जायसवाल की समझाइश के बाद परिवार पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुआ।

सीओ ने बताया:

“फिलहाल यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। मानसिक तनाव इसका कारण हो सकता है, लेकिन हम हर पहलू की जांच कर रहे हैं। तहरीर मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”


गांव में पसरा मातम, हर आंख नम

हर्रा गांव में गुलफाम की मौत की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। जैसे ही लोगों को पता चला कि उसके पीछे पांच छोटे-छोटे बच्चे हैं, तो हर कोई द्रवित हो उठा।
ग्रामीणों का कहना है कि गुलफाम बेहद सीधा-सादा और मेहनती इंसान था। बच्चों से बहुत प्यार करता था। पत्नी की मौत के बाद उसने बच्चों के लिए सबकुछ किया — लेकिन शायद अकेलेपन का बोझ उसे खा गया।


मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा सवाल: क्या समय रहते मदद मिलती तो बच सकता था गुलफाम?

यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक विफलता की भी कहानी है।
गुलफाम का लगातार अवसाद में रहना, आर्थिक दबाव और बच्चों की जिम्मेदारी — ये सब संकेत थे।
लेकिन क्या किसी ने इन संकेतों को गंभीरता से लिया?

यह वक्त है यह सोचने का कि:

  • क्या गांव या मोहल्ले के स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य पर बात होती है?

  • क्या कोई ऐसा मंच है जहां पुरुष खुलकर अपने तनाव की बात कह सकें?

  • क्या सरकार या समाज ऐसे परिवारों के लिए समय रहते सहायता कर पाता है?


सामाजिक अपील: बच्चों की मदद करें

गांव के समाजसेवियों और कुछ स्थानीय संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि:

  • इन पांच बच्चों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित किया जाए।

  • शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थायी व्यवस्था की जाए।

  • बाल संरक्षण समिति के तहत संरक्षण आवंटित हो।

  • मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की व्यवस्था की जाए।


यदि आप या आपके आस-पास कोई मानसिक तनाव से जूझ रहा हो, तो चुप न रहें। मदद मांगना कमजोरी नहीं, समझदारी है।


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Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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