यूपी बिजली कर्मियों की हड़ताल पर सरकार का सख्त फैसला:
बिना जांच के होगी बर्खास्तगी, नया नियम बना देगा स्थिति और नाजुक
रिपोर्टर: अशु झा | भारत क्रांति न्यूज़
स्थान: लखनऊ | दिनांक: 24 मई 2025
उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मियों की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। 29 मई से प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा के बाद योगी सरकार ने बिना जांच-पड़ताल के बिजली कर्मचारियों को बर्खास्त करने का नियम लागू कर दिया है। यह फैसला प्रदेश की बिजली व्यवस्था को बाधित होने से बचाने के लिए लिया गया है, लेकिन इससे कर्मचारियों के बीच भारी नाराजगी व्याप्त है।
निजीकरण का विवाद
पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ बिजली कर्मी सशक्त विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि निजीकरण से न केवल उनकी नौकरी खतरे में पड़ेगी, बल्कि आम जनता को भी महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी। कर्मचारी यूनियनें हड़ताल के जरिए अपनी मांगें मनवाने पर अड़ी हैं।
सरकार ने किया पंचम संशोधन
उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के निदेशक मंडल ने हाल ही में पावर कार्पोरेशन कार्मिक (अनुशासन एवं अपील) विनियमावली 2020 में संशोधन किया। इस संशोधन के तहत अब नियुक्ति प्राधिकारी को बिना जांच-पड़ताल के कर्मचारियों को सीधे बर्खास्त, पदावनति, या पद से हटाने का अधिकार मिल गया है। इसे पंचम संशोधन विनियमावली 2025 कहा गया है।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि बिजली की निरंतर आपूर्ति जन-जीवन के लिए बेहद जरूरी है। निजीकरण से सेवा में सुधार होगा और बिजली व्यवस्था अधिक पारदर्शी और कुशल बनेगी। सरकार के अनुसार, इस कठोर कदम से हड़ताल की संभावना कम होगी और प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को बिजली संकट से बचाया जा सकेगा।
कर्मचारी संगठनों की नाराजगी
वहीं, बिजली कर्मचारियों में संशोधन को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि सरकार बिना किसी वार्ता के कठोर कदम उठा रही है, जो कर्मचारियों के अधिकारों का हनन है। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई कर्मचारियों को डराने-धमकाने की कोशिश है और इससे हड़ताल और संघर्ष और तेज होगा।
“हम अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। सरकार चाहे जो भी करे, हम हड़ताल करेंगे।” — बिजली कर्मचारी नेता
जनता पर पड़ सकता है बड़ा असर
इस गतिरोध का असर सीधे आम जनता पर पड़ सकता है। यदि हड़ताल हुई तो बिजली कटौती की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे उद्योग, व्यवसाय और घरेलू उपयोगकर्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
29 मई की चुनौती
29 मई को यह टकराव अपने चरम पर होगा। कर्मचारी अपनी हड़ताल शुरू कर सकते हैं, जबकि सरकार सख्ती से कार्रवाई कर सकती है। इस बीच प्रदेश के लाखों लोगों की नजरें इस तारीख पर टिकी हैं, क्योंकि बिजली आपूर्ति और सामाजिक शांति दोनों इस संघर्ष से प्रभावित हो सकते हैं।
निष्कर्ष
यूपी की बिजली व्यवस्था में यह विवाद सरकार और कर्मचारियों के बीच एक गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। सरकार ने सुरक्षा के नाम पर सख्ती अपनाई है, वहीं कर्मचारी अपनी हक की लड़ाई जारी रखना चाहते हैं। आगामी दिन प्रदेश के लिए चुनौतियों और बदलाव दोनों लेकर आएंगे।
भारत क्रांति न्यूज़ इस मुद्दे पर लगातार आपकी आवाज बनेगा।
रिपोर्टर: अशु झा | मुख्य संपादक: शिव शंकर दुबे
Author: Bharat Kranti News
Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.
