चकबंदी मामलों में बड़ा बदलाव: 35 दिन में निस्तारण का लक्ष्य, जिलाधिकारी खुद करेंगे निगरानी
रिपोर्ट: आशु झा, संपादक: शिव शंकर दुबे, भारत क्रांति न्यूज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चकबंदी मामलों को लेकर राजस्व विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब हर चकबंदी मामला अधिकतम 35 दिनों में निपटाना होगा। इस काम को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सहायक चकबंदी अधिकारियों के कार्यालयों को ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा जा रहा है, ताकि निस्तारण प्रक्रिया तेज हो सके।
चकबंदी मामलों की मॉनिटरिंग होगी डिजिटल
चकबंदी निदेशालय ने मामलों की निगरानी के लिए कंसोलिडेशन कोड कंप्यूटराइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया है। इस अत्याधुनिक प्रणाली के तहत, हर जिले के चकबंदी मामलों पर जिलाधिकारी की नजर रहेगी। हर स्तर की कार्रवाई का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज होगा, जिससे किसी भी मामले की प्रगति को आसानी से ट्रैक किया जा सके।
जिलाधिकारियों के लिए सख्त निर्देश
राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद ने जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चकबंदी मामलों की समीक्षा के लिए बनाए गए नौ विशेष प्रारूपों का पालन करें। इसमें यह देखा जाएगा कि कौन से मामले कितने समय से लंबित हैं और उनकी देरी के क्या कारण हैं।
चकबंदी मामलों की श्रेणियां तय
चकबंदी के मामलों को निस्तारण के लिए तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा:
1. तीन महीने तक लंबित मामले।
2. तीन से छह महीने तक लंबित मामले।
3. तीन साल या उससे अधिक समय से लंबित मामले।
जिलाधिकारियों को हर महीने के पहले सप्ताह में इन मामलों की गहन समीक्षा करनी होगी और 10 तारीख तक रिपोर्ट ऑनलाइन तैयार कर चकबंदी आयुक्त को भेजनी होगी।
कौन-कौन सी धाराएं होंगी शामिल?
चकबंदी मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए निदेशालय ने धारा-7, 8, 9, 10, 20, 23, 24, 27 और धारा-52 को प्रमुखता दी है। हर स्तर पर कार्रवाई का स्पष्ट विवरण दर्ज किया जाएगा।
चकबंदी में पारदर्शिता और गति लाने की कोशिश
चकबंदी निदेशालय का यह प्रयास लंबित मामलों को खत्म करने और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जिलाधिकारियों के सीधे हस्तक्षेप और डिजिटल मॉनिटरिंग से कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है।
चकबंदी मामलों की यह नई व्यवस्था उत्तर प्रदेश के राजस्व सुधार के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
रिपोर्ट: आशु झा, संपादक: शिव शंकर दुबे, भारत क्रांति न्यूज
Author: Bharat Kranti News
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