पूर्वांचल की धड़कन औराई चीनी मिल: पुनः संचालन की मांग पर किसानों का जुटान

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औराई चीनी मिल: एक सपने की टूटन और किसानों की उम्मीदों का आंदोलन

भदोही से भारत क्रान्ति की विशेष रिपोर्ट

भदोही 25 अक्टूबर: पूर्वांचल के लोग 1971 के उस ऐतिहासिक पल को शायद ही भुला पाएं, जब औराई को आधा दर्जन जिलों की सबसे बड़ी सौगात औराई चीनी मिल के रूप में मिली थी। पूर्व मंत्री पंडित श्यामधर मिश्र के प्रयासों से स्थापित इस मिल ने किसानों और मजदूरों के जीवन में खुशहाली ला दी थी। लेकिन 2007 में इस मिल के बंद होते ही हजारों किसानों की उम्मीदें टूट गईं और सैकड़ों मजदूरों का सहारा छिन गया। समय-समय पर इस मिल को पुनः चालू करने के वादे किए गए, लेकिन वे सभी वादे केवल सब्जबाग ही साबित हुए हैं।

95 एकड़ में फैला चीनी मिल का साम्राज्य

औराई चीनी मिल 95 एकड़ के क्षेत्र में फैला है। इसे स्थापित करने के लिए सहसेपुर, भवानीपुर, खोरीडीह, अमीरपंट्टी, महथुआ, और जेठूपुर के 87 किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई थी। सरकार ने इन किसानों को मुआवजा देने के साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी थी। उस समय इस मिल में फतेहपुर, इलाहाबाद, जौनपुर, वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, और मीरजापुर जैसे जिलों से किसान गन्ना लेकर आते थे।

राष्ट्रीय स्तर पर था औराई चीनी मिल का दबदबा

औराई चीनी मिल में प्रतिदिन 1250 कुंतल गन्ने की पेराई होती थी, जिससे प्रतिदिन एक हजार से अधिक बोरे चीनी का उत्पादन किया जाता था। इस उत्कृष्ट उत्पादकता के कारण इस मिल को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। कर्मचारियों को अतिरिक्त बोनस भी दिया जाता था, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होता था।

100 करोड़ का घाटा बना बंदी का कारण

मिल को बंद करने का मुख्य कारण 100 करोड़ रुपये का घाटा बताया गया। यह भी कहा गया कि पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण मिल की हालत खराब हो गई थी। हालांकि किसानों का सवाल है कि अगर गन्ने की पर्याप्त उपज नहीं हो रही थी, तो उन्हें समय पर अच्छी उपज के लिए बेहतर बीज और खाद क्यों नहीं दिए गए। आवश्यक सुविधाओं के अभाव में किसानों की समस्याएं और बढ़ गईं, जिसका सीधा असर मिल पर पड़ा।

मजदूरों की जिंदगी में अंधेरा

2007 में मिल बंद हो गई, लेकिन सभी कर्मियों की छंटनी 2010 में की गई। 2007 में जिन कर्मचारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी, उन्हें तो पूरा भुगतान मिल गया, लेकिन जो 2010 तक वेतन की मांग करते रहे, उनके भुगतान की स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है। मजदूर आज भी बेरोजगार और बेसहारा जीवन जी रहे हैं, और उनकी पीड़ा को सुनने वाला कोई नहीं है।

क्या मिल फिर से चालू हो पाएगी?

हाल ही में किसान संगठनों और भारतीय किसान संघ के काशी प्रांतीय मंत्री अनिल मिश्रा के नेतृत्व में किसानों ने आंदोलन की तैयारी की है। 26 अक्टूबर को औराई चीनी मिल को पुनः चालू कराने के लिए एक विशाल रैली और जनसभा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लाखों किसानों के शामिल होने की उम्मीद है। अनिल मिश्रा का कहना है कि इस मिल को चालू कराना क्षेत्र के किसानों और मजदूरों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

नए संघर्ष के साथ किसानों की नई उम्मीद

किसानों और मजदूरों की आंखों में उम्मीद की नई किरण जगी है। देखना यह है कि इस आंदोलन का कितना असर होता है और क्या औराई चीनी मिल के ताले फिर से खुलेंगे या यह मुद्दा फिर से केवल वादों तक ही सीमित रह जाएगा।

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Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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