हरितालिका तीज: एक विस्तृत दृष्टिकोण
हरितालिका तीज त्यौहार क्या है?
हरितालिका तीज भारतीय उपमहाद्वीप में महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाले प्रमुख हिन्दू त्यौहारों में से एक है। यह त्यौहार भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन की विशेष स्मृति में मनाया जाता है। “हरितालिका” शब्द का अर्थ होता है “हरित” – हरी (देवी पार्वती) और “तालिका” – साथी। इसलिए, इस पर्व का संबंध देवी पार्वती के शिवजी के प्रति स्नेह और उनके साथ संबंध की महत्वपूर्ण कहानी से है। महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं, जिससे उनके पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
यह कब मनाया जाता है?
हरितालिका तीज भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह तिथि आमतौर पर अगस्त या सितंबर के महीने में आती है। इस दिन चंद्रमा की पूजा के लिए महिलाएं विशेष रूप से तैयार होती हैं और व्रत का पालन करती हैं।
हरितालिका तीज के मुख्य पहलू
व्रत:
हरितालिका तीज का व्रत महिलाओं के लिए विशेष रूप से कठिन होता है। महिलाएं इस दिन उपवासी रहती हैं और निर्जला व्रत करती हैं, अर्थात वे बिना पानी पीए पूरा दिन उपवास करती हैं। इस व्रत को करने से माना जाता है कि पति की आयु बढ़ती है और विवाहित जीवन सुखमय रहता है। व्रत के दौरान महिलाएं पूजा स्थल पर धूप, दीपक और अन्य पूजन सामग्री से सजावट करती हैं और संपूर्ण श्रद्धा से व्रत करती हैं।
पूजा:
पूजा के दौरान महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं और भगवान शिव तथा देवी पार्वती की पूजा करती हैं। इस दिन विशेष रूप से पार्वती माता की मूर्ति बनायी जाती है और शिवजी की मूर्ति के साथ पूजा की जाती है। पूजा के बाद महिलाएं भोग, फल और मिठाई अर्पित करती हैं और परिवार के साथ प्रसाद बांटती हैं। पूजा के समय महिलाएं पारंपरिक गीत और भजन गाती हैं जो इस दिन की दिव्यता को बढ़ाते हैं।
अनुष्ठान:
हरितालिका तीज के दिन महिलाएं विशेष अनुष्ठान करती हैं। ये अनुष्ठान आमतौर पर रात भर जागकर किए जाते हैं, जिसमें महिलाएं भजन-कीर्तन, कथा और जप करती हैं। पूजा की रात को महिलाएं विशेष रूप से सजधज कर और मेहंदी लगाकर आती हैं। इस दिन को मनाने के लिए कई क्षेत्रों में विशेष मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
महत्व:
हरितालिका तीज का धार्मिक महत्व बहुत गहरा है। यह पर्व न केवल पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए मनाया जाता है, बल्कि यह महिलाओं के बलिदान और आत्मसंतोष को भी दर्शाता है। यह पर्व महिलाओं के लिए समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है, और उनकी शक्ति और समर्पण को मान्यता देता है।
क्षेत्रीय उत्सव:
हरितालिका तीज का उत्सव भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में यह त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाएं सजधज कर, मेहंदी लगाकर और विशेष पूजा विधियों का पालन करती हैं। नेपाल में भी हरितालिका तीज एक प्रमुख पर्व है, जहां इसे “हरितालिका तीज” के नाम से मनाया जाता है।
अवधि:
हरितालिका तीज का पर्व एक दिन और एक रात की अवधि के लिए मनाया जाता है। महिलाएं इस दिन को पूरी निष्ठा और श्रद्धा से मनाती हैं, जिसमें उपवासी रहना, पूजा करना और जागरण करना शामिल है। इस अवधि में महिलाएं अपनी भक्ति और श्रद्धा को भगवान शिव और देवी पार्वती के प्रति अर्पित करती हैं।
पौराणिक कथाएं:
हरितालिका तीज की पौराणिक कथा के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी। उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इस कथा के अनुसार, पार्वती जी ने अपने माता-पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर और कठिन तपस्या कर भगवान शिव को प्राप्त किया। इस पौराणिक कथा की याद में, महिलाएं इस दिन व्रत और पूजा करती हैं, जो उनके समर्पण और श्रद्धा को दर्शाता है।

हरितालिका तीज का पर्व एक ओर जहां धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, वहीं यह सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर को भी संरक्षित करने का एक माध्यम है। इस त्यौहार की विभिन्न विधियां और रीति-रिवाज भारतीय समाज की विविधता और सांस्कृतिक धरोहर को प्रकट करते हैं।
संपादक : आशु झा
भारत क्रांति न्यूज़
Author: Bharat Kranti News
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