भदोही: जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ए, एबी और ओ निगेटिव ग्रुप का खून खत्म, मरीजों की बढ़ेगी परेशानी
ज्ञानपुर। महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में खून की कमी हो गई है। अस्पताल में ए, एबी और ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप का एक भी यूनिट उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दो से ढाई लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में दो नवंबर तक महज 18 यूनिट खून शेष था, जबकि इसकी क्षमता 150 यूनिट की है। जिले में प्रतिदिन औसतन दो यूनिट खून की खपत होती है।
जिला अस्पताल परिसर में जनपद का इकलौता ब्लड बैंक संचालित है। यहां 150 यूनिट क्षमता वाले दो फ्रीजर हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ब्लड बैंक में ओ पॉजिटिव के 10, ए पॉजिटिव के तीन, बी पॉजिटिव के दो, एबी पॉजिटिव के दो और बी निगेटिव का एक यूनिट खून उपलब्ध है। वहीं, ए निगेटिव, एबी निगेटिव और ओ निगेटिव ग्रुप का खून पूरी तरह खत्म हो चुका है।
ब्लड बैंक से जरूरतमंदों को 1050 रुपये सरकारी शुल्क लेकर रक्त उपलब्ध कराया जाता है। निगेटिव ब्लड ग्रुप की उपलब्धता बेहद कम होने के कारण आपात स्थिति में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जरूरत पड़ने पर लोगों को निजी ब्लड बैंक का सहारा लेना पड़ता है, जहां अधिक शुल्क चुकाना पड़ता है। निजी ब्लड बैंक में रक्त की गुणवत्ता को लेकर भी मरीजों और उनके परिजनों के मन में सवाल उठते रहते हैं।
ब्लड बैंक में उपलब्ध खून की स्थिति
| ब्लड ग्रुप | उपलब्ध यूनिट | ओ पॉजिटिव | 10 | ए पॉजिटिव | 03 | एबी पॉजिटिव | 02 | बी पॉजिटिव | 02 | बी निगेटिव | 01 | ए निगेटिव | 00 | एबी निगेटिव | 00 | ओ निगेटिव | 00 | कुल | 18 |
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सरकारी अस्पताल की अपेक्षा निजी अस्पतालों में अधिक खपत
जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 800 मरीजों की ओपीडी होती है। इसके अलावा 50 से 60 मरीज इमरजेंसी में पहुंचते हैं। अस्पताल में हर महीने 60 से 70 प्रसव होते हैं। इनमें प्रतिदिन औसतन दो मरीजों को खून की जरूरत पड़ती है। हालांकि, सरकारी अस्पताल की अपेक्षा निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन अधिक संख्या में ब्लड लेने पहुंचते हैं। उपलब्धता के अनुसार, उन्हें रक्त मुहैया कराया जाता है।
जिले में पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की खपत निगेटिव ग्रुप की अपेक्षा अधिक है। रक्त की कमी दूर करने के लिए रेडक्रॉस और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
थैलेसीमिया, किडनी और दुर्घटना के मरीजों को जरूरत
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. प्रदीप यादव ने बताया कि थैलेसीमिया, किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों, सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं में खून की कमी हो सकती है। थैलेसीमिया के ऐसे मरीज, जो बाहर उपचार कराते हैं, उन्हें छोड़कर दो से तीन मरीजों को हर महीने ब्लड दिया जाता है।
रक्तदान के लिए लोगों से आगे आने की अपील
नेवाद मोढ़ निवासी विनय सरोज ने बताया कि बीते महीने उनके एक परिचित को खून की जरूरत थी। जिला अस्पताल पहुंचने पर संबंधित ब्लड ग्रुप का रक्त नहीं मिला। उन्होंने कहा कि ब्लड बैंक में खून की कमी दूर करने के लिए लोगों को आगे आने की जरूरत है।
गोपीगंज निवासी अनिल पांडेय ने बताया कि 10 दिन पहले उनके एक रिश्तेदार को ओ निगेटिव ब्लड की जरूरत थी, लेकिन जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में यह उपलब्ध नहीं था। मजबूरी में निजी अस्पताल से खून लेना पड़ा। उन्होंने लोगों से जिला अस्पताल में रक्तदान करने की अपील की।
एमसीएच के प्रभारी सीएमएस डॉ. धीरज प्रकाश ने बताया कि ब्लड बैंक से हर जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन रक्तदान के लिए लोग अपेक्षित संख्या में आगे नहीं आते हैं। उन्होंने कहा कि एक यूनिट रक्त से चार लोगों की जान बचाई जा सकती है। ऐसे में लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक होकर आगे आना चाहिए।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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