SC/ST Act के कथित दुरुपयोग पर कोर्ट की सख्ती, लखनऊ के अधिवक्ता परमानंद को उम्रकैद
18 मामले खुद और 11 मामले महिला के माध्यम से दर्ज कराने का अभियोजन का दावा, कोर्ट ने लगाया ₹5.10 लाख का जुर्माना
लखनऊ। SC/ST Act जैसे महत्वपूर्ण कानून के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक मामले में लखनऊ की विशेष SC/ST अदालत ने अधिवक्ता परमानंद गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उन पर ₹5.10 लाख का जुर्माना भी लगाया। फैसला विशेष न्यायाधीश (SC/ST Act) विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने अगस्त 2025 में सुनाया था।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों और अभियोजन पक्ष के अनुसार, परमानंद गुप्ता का लखनऊ के विभूतिखंड क्षेत्र में रहने वाले अरविंद यादव और उनके परिवार से संपत्ति को लेकर विवाद था। आरोप है कि गुप्ता ने अपनी पत्नी के ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली पूजा रावत के माध्यम से विरोधियों के खिलाफ SC/ST Act, दुष्कर्म और छेड़छाड़ जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज करवाए।अभियोजन ने अदालत में बताया कि गुप्ता के नाम से 18 मामले और पूजा रावत के माध्यम से 11 मामले दर्ज कराए गए थे। इस तरह कुल 29 मामलों का रिकॉर्ड सामने आया।
SC/ST Act का इस्तेमाल कैसे हुआ?
रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में आरोप लगाया गया कि गुप्ता ने पूजा रावत की अनुसूचित जाति की पहचान का इस्तेमाल करते हुए अपने विरोधियों के खिलाफ SC/ST Act के तहत शिकायतें दर्ज कराईं। इनमें दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के आरोप भी शामिल थे।
एक मामले की जांच में पुलिस को आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसी क्रम में पूरे मामले की जांच और पहले दर्ज शिकायतों की भूमिका पर भी सवाल उठे।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI जांच
मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 5 मार्च 2025 को हाईकोर्ट ने मामले की CBI जांच के आदेश दिए। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और कई शिकायतों तथा उनसे जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई।
जांच से संबंधित रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि कथित घटनाओं के समय पूजा रावत की मौजूदगी और शिकायतों में बताए गए स्थानों को लेकर सवाल उठे थे।
पूजा रावत ने अदालत में क्या कहा?
मामले की कार्यवाही के दौरान पूजा रावत ने अदालत में आवेदन देकर अपना पक्ष रखा। रिपोर्टों के अनुसार, उसने आरोप लगाया कि वह रोजगार की तलाश में गोरखपुर से लखनऊ आई थी और गुप्ता की पत्नी के ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। उसने दावा किया कि गुप्ता और उसकी पत्नी ने उसे अपने प्रभाव में लेकर झूठे मुकदमों में इस्तेमाल किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने उसके आवेदन को स्वीकार करते हुए उसे सशर्त क्षमादान/राहत दी।
कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष SC/ST अदालत ने परमानंद गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने ₹5,10,000 का जुर्माना भी लगाया।
रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजने का निर्देश भी दिया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
SC/ST (Prevention of Atrocities) Act अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को अत्याचार और भेदभाव से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया महत्वपूर्ण कानून है। ऐसे कानून के तहत दर्ज शिकायतों में यदि जांच के दौरान झूठे या मनगढ़ंत आरोप सामने आते हैं, तो मामला न्यायिक रूप से गंभीर हो जाता है।
इस मामले में अदालत के फैसले ने कथित तौर पर कानून के दुरुपयोग और फर्जी मुकदमों के जरिए विरोधियों पर दबाव बनाने के आरोपों को लेकर सख्त संदेश दिया है। हालांकि, रिपोर्टिंग में यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि SC/ST Act स्वयं “गलत” नहीं है; अदालत का फैसला इस विशेष मामले में अभियुक्त द्वारा कानून के कथित दुरुपयोग से संबंधित है।
Bharat Kranti News Fact Note
इस मामले से जुड़ी विभिन्न रिपोर्टों में 29 मामलों का उल्लेख है। उपलब्ध विवरण के अनुसार 18 मामले परमानंद गुप्ता के नाम से और 11 मामले पूजा रावत के माध्यम से दर्ज किए गए बताए गए हैं। इसलिए खबर में “29 फर्जी मुकदमे दर्ज कराने वाले” लिखते समय यह स्पष्ट करना अधिक सटीक है कि 29 मामलों का कुल आंकड़ा है।
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Author: Bharat Kranti News
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