गांव-नगर के बीच अधर में खमरिया के 50 लोग, नहीं पहुंचा एसआईआर फॉर्म
खमरिया। नगर पंचायत खमरिया के वार्ड सात स्थित बगीचा मोहल्ले के करीब 50 लोग इन दिनों प्रशासनिक असमंजस का सामना कर रहे हैं। नगर पंचायत में शामिल होने के बावजूद इनके घरों तक अब तक एसआईआर फॉर्म नहीं पहुंच पाए, जिससे ये परिवार विभिन्न सरकारी योजनाओं और दस्तावेजी प्रक्रियाओं से वंचित हो रहे हैं।
गांव और नगर की सीमा विवाद ने बढ़ाई परेशानी
बगीचा मोहल्ला पहले अहिमनुपर गांव का हिस्सा था, जिसे स्थानीय स्तर पर सुल्तानापुर नाम से भी जाना जाता था। बाद में यह क्षेत्र नगर पंचायत खमरिया में शामिल कर दिया गया, लेकिन रिकॉर्ड में बदलाव ठीक से दर्ज न होने के कारण यह क्षेत्र दो व्यवस्थाओं के बीच उलझ गया है।
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नगर क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम नहीं
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ग्राम पंचायत कह रही—यह अब उनका हिस्सा नहीं
यही वजह है कि पूरे मोहल्ले के लगभग 50 लोग किसी भी सरकारी सूची में सही ढंग से दर्ज नहीं हो पाए हैं।
2020 और 2024 में दो बार मिला लिखित प्रमाण
निवासियों का दावा है कि उन्हें दो बार लिखित रूप से बताया गया कि वे नगर पंचायत खमरिया के निवासी हैं—
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2020: अहिमनुपर गांव के पूर्व प्रधान डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने प्रमाण पत्र दिया
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2024: वर्तमान प्रधान रामप्रकाश ने भी बस्ती को नगर पंचायत का हिस्सा बताया
इनमें से कई लोगों ने निकाय चुनाव में मतदान भी किया था, फिर भी एसआईआर फॉर्म न मिलने से लोग असहज और निराश हैं।
बुनियादी सुविधाएं मौजूद, फिर भी दस्तावेज अधूरे
मोहल्ले के परिवारों के पास
आधार
पैन
बिजली कनेक्शन
पानी का कनेक्शन
जैसी सभी सुविधाएं मौजूद हैं।
निवासी महेश यादव ने बताया कि वे नगर पंचायत से जल कनेक्शन लेकर नियमित बिल जमा करते हैं। बिजली का भी मीटर लगा हुआ है और भुगतान समय पर किया जाता है। फिर भी नगर रिकॉर्ड में उनका नाम शामिल नहीं है।
प्रशासनिक चक्कर — एसडीएम और ईओ को भी लिखे पत्र
प्रभावित लोगों ने कई बार
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एसडीएम ज्ञानपुर
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अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत खमरिया
को शिकायत पत्र देकर समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
बीएलओ के पास सूची में नाम नहीं
मतदाता सूची के जिम्मेदार बीएलओ ने बताया कि उन्हें जो सूची उपलब्ध कराई गई है, उसमें इन परिवारों का नाम बिल्कुल नहीं है। इस कारण वे एसआईआर फॉर्म दे ही नहीं सके।
डीएम का बयान—2003 की एसआईआर में नाम नहीं, डिजिटाइजेशन किया गया
जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने स्पष्ट किया कि इन परिवारों का नाम वर्ष 2003 की ओरिजनल एसआईआर में दर्ज नहीं था।
इसी के चलते इन्हें “तीसरे विकल्प” के तहत डिजिटाइजेशन प्रक्रिया में शामिल करना पड़ा है।
डीएम का आश्वासन:
“ज़रूरी दस्तावेजों के आधार पर इन लोगों के नाम अंतिम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। समस्या जल्द हल होगी।”
स्थानीय लोगों की मांग
मोहल्ले के निवासी चाहते हैं कि—
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उनके क्षेत्र को नगर रिकॉर्ड में जल्द अपडेट किया जाए
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एसआईआर फॉर्म उपलब्ध कराए जाएं
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नगर पंचायत में उनका नाम आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाए
लोगों का कहना है कि वे नगर की सभी सुविधाएं लेते हैं, बिल भरते हैं, फिर भी दस्तावेजी पहचान से वंचित हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।
