रुपये लेकर नहीं बनवाया आवास, अब होगी रिकवरी; PM आवास योजना के 70 लाभार्थी 6 साल से लापता निर्माण से
ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में जिले के 70 लाभार्थियों ने पहली किस्त के रूप में 35 लाख रुपये तो ले लिए, लेकिन छह साल गुजर जाने के बाद भी अपने आवास का निर्माण शुरू नहीं किया। लगातार चेतावनियों के बावजूद निर्माण न करने पर अब विभाग ने इन सभी के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है।
तीन नोटिस के बाद भी 90% लाभार्थी नहीं जागे
डूडा (DUDA) विभाग ने वर्ष 2017 से 2020 के बीच पहली किस्त लेने वाले लाभार्थियों को तीन बार नोटिस जारी किए। नोटिस में जल्द निर्माण कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन 70 में से लगभग 63 लाभार्थियों ने आज तक कोई काम शुरू नहीं किया।
विभागीय सूत्रों के अनुसार—
“लाभार्थियों को पर्याप्त समय और नोटिस दिए गए। अब सरकारी धन की रिकवरी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।”
योजना की शुरुआत और जिले की स्थिति
शहरी गरीबों को पक्की छत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 2017 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) शुरू की थी। जिले में तीन साल के भीतर कुल 27,136 आवास स्वीकृत किए गए।
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सभी लाभार्थियों को पहली किस्त 50,000 रुपये जारी की गई।
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26,500 से अधिक लाभार्थियों ने अपने आवासों का निर्माण पूरा कर लिया है।
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शेष काम अंतिम चरण में है, लेकिन 70 मामलों में निर्माण शुरू भी नहीं हुआ।
कहाँ-कहाँ से हैं ये 70 लाभार्थी?
प्राप्त सूची अनुसार, जिन लोगों ने पहली किस्त लेकर भी निर्माण नहीं कराया, वे इन नगर निकायों से हैं—
| नगर निकाय | लाभार्थियों की संख्या |
|---|---|
| भदोही नगर पालिका | 4 |
| गोपीगंज | 13 |
| सुरियावां | 08 |
| ज्ञानपुर | 18 |
| नई बाजार | 5 |
| घोसिया | 14 |
| खमरिया | 8 |
| कुल | 70 लाभार्थी |
इनमें से कई लाभार्थियों ने जानबूझकर निर्माण नहीं कराया, कुछ ने जगह की कमी, विवाद या आर्थिक तंगी का हवाला दिया।
वसूली के लिए बन रही रणनीति
डूडा अब ऐसे लाभार्थियों से 35 लाख रुपये की पूरी राशि रिकवर करने पर विचार कर रहा है। अधिकारियों ने संबंधित नगर निकायों को लाभार्थियों की विस्तृत रिपोर्ट और निर्माण की वर्तमान स्थिति उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
कार्रवाई में शामिल होगा—
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अंतिम नोटिस
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वसूली प्रमाण पत्र (आरसी) जारी
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राजस्व वसूली की प्रक्रिया
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बैंक खातों एवं संपत्तियों पर प्रभाव
लापरवाही से योजना की बदनामी
अधिकारी बताते हैं कि अधिकांश लाभार्थियों को पर्याप्त समय, तकनीकी मार्गदर्शन और निर्माण की निगरानी प्रदान की गई थी। इसके बावजूद वर्षों तक निर्माण न कराना योजना के उद्देश्य को प्रभावित करता है।
यह भी माना जा रहा है कि कुछ लाभार्थियों ने राशि किसी और कार्य में खर्च कर दी, जबकि कुछ लाभार्थी दूसरे जिलों में पलायन कर गए।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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