धनुष यज्ञ मेला: संस्कृति, आस्था और परंपरा का अनोखा संगम — आज और कल चरम पर पहुंचेगा आयोजन
मोढ़/अठगवां। जमुनीपुर अठगवां गांव के मेला की बारी हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित धनुष यज्ञ मेला सिर्फ धार्मिक मंचन भर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक विरासत का भव्य उत्सव बन चुका है। मेले के तीसरे दिन सोमवार को बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बच्चे और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा मेला परिसर भक्तिरस और उल्लास से गूंज उठा।
शताब्दी से अधिक पुरानी परंपरा
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार धनुष यज्ञ मेला करीब 100 वर्ष पहले शुरू हुआ था। शुरुआत में यह छोटा धार्मिक मंचन था, लेकिन अब समय के साथ यह पूर्वांचल का प्रमुख धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है।
हर वर्ष ग्रामीणों के साथ-साथ प्रवासी और बाहरी जिलों के लोग भी यहां पहुंचते हैं, जिससे गांव की रौनक कई गुना बढ़ जाती है।
यज्ञ मंचन में उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब
लीलाओं के मंचन के दौरान राम, लक्ष्मण, जानकी और राजा जनक सहित सभी पात्रों की भव्य झांकियां निकाली जाती हैं, जिन्हें देखने हजारों की भीड़ जुटती है।
विशेष रूप से श्रीराम–सीता विवाह और धनुष यज्ञ लीला के मंचन के समय वातावरण पूरी तरह जयकारों से गूंज उठता है।
“भगवान श्रीराम के इस पावन प्रसंग को देखने के लिए ही हम हर साल गांव लौटते हैं। चाहे कितनी भी व्यस्तता हो, यह परंपरा नहीं छोड़ सकते।”
– मुंबई से आए एक श्रद्धालु
मेले में खरीदारी और मनोरंजन का मिलाजुला अनुभव
मेला परिसर में लगी दुकानों में
🟢 खिलौने
🟢 घरेलू सामान
🟢 पूजा सामग्री
🟢 जूते–चप्पल
🟢 कपड़े
🟢 चाट–नाश्ता–मिष्ठान
की बिक्री पूरे दिन होती है।
बच्चों के लिए झूले और मिनी मनोरंजन पार्क मेले को पूरी तरह पारिवारिक उत्सव बना देते हैं। विशेष रूप से गोधना की मिठाइयां मेले की पहचान बन चुकी हैं, जिन्हें खरीदने के लिए लंबी कतारें लग रही हैं।
सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन अलर्ट
भीड़ को देखते हुए प्रशासन और आयोजन समिति द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं।
🔹 पुलिस और स्वयंसेवक तैनाती
🔹 पार्किंग व्यवस्था
🔹 चिकित्सा सुविधा
🔹 प्रकाश और पेयजल व्यवस्थाएं
लगाई गई हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
अंतिम दिन का मुख्य आकर्षण
26 नवंबर को श्रीराम द्वारा खिचड़ी प्रसाद ग्रहण कर अयोध्या (महरभा गांव) प्रस्थान का मंचन किया जाएगा जो मेले का सबसे भावुक क्षण माना जाता है।
इस दिन हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर साल भर के सुख–समृद्धि व शांति की कामना करते हैं।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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