आगामी सत्र से एमडीएम में मिलेगा मोटा अनाज, सुधरेगी नौनिहालों की सेहत

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मोटे अनाज के सेवन से सुधरेगी नौनिहालों की सेहत

आगामी शिक्षा सत्र से परिषदीय विद्यालयों में एमडीएम में मिलेगा पौष्टिक मिलेट्स भोजन

ज्ञानपुर।
जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब एक लाख 40 हजार बच्चों के लिए अब मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आगामी शिक्षा सत्र से बच्चों को मोटे अनाज (मिलेट्स) से तैयार पौष्टिक भोजन परोसा जाएगा। इससे न केवल बच्चों की सेहत में सुधार होगा, बल्कि उनमें कुपोषण जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लगेगा।

शिक्षा विभाग ने तेज की तैयारी

करीब एक वर्ष पूर्व महानिदेशक शिक्षा ने पत्र भेजकर एमडीएम में सप्ताह के एक दिन मोटे अनाज से बने व्यंजन देने के निर्देश दिए थे। हालांकि, यह व्यवस्था अब तक जिले में शुरू नहीं हो सकी थी। अब प्रशासन ने इस दिशा में गंभीरता दिखाई है और डीएम की अध्यक्षता में हुई हालिया बैठक में इसे प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।

बैठक में निर्णय लिया गया कि मोटे अनाज की आपूर्ति के लिए जिले में मौजूद एफपीओ (कृषि उत्पादक संगठन) का चयन किया जाएगा। इससे न केवल स्थानीय किसानों को बाजार मिलेगा, बल्कि विद्यालयों में बच्चों को शुद्ध, स्थानीय रूप से उत्पादित अनाज भी उपलब्ध होगाकृषि और शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल

कृषि विभाग और बेसिक शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से इस योजना को धरातल पर उतारने में जुटे हैं। दोनों विभागों की टीमें मिलकर मोटे अनाज की उपलब्धता, भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था को अंतिम रूप देने में लगी हैं।

उप निदेशक कृषि डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया —

“मोटे अनाज को स्कूलों के मध्याह्न भोजन में शामिल करने की व्यवस्था फिलहाल पाइपलाइन में है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर इसे जल्द लागू किया जाएगा। इससे बच्चों को पोषणयुक्त भोजन मिलेगा और स्थानीय किसानों को भी लाभ होगा।”

 बच्चों के लिए बनेगा संतुलित मेन्यू

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विकास चौधरी ने बताया —

“मोटे अनाज को एमडीएम में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। बच्चों को सप्ताह के एक दिन बाजरा, ज्वार, कोदो या रागी से बने व्यंजन दिए जाएंगे।”

वर्तमान में एमडीएम में बच्चों को हर दिन अलग-अलग मेन्यू के अनुसार भोजन दिया जाता है, जिसमें दाल-चावल, सब्जी, खिचड़ी और फल शामिल होते हैं। अब इस मेन्यू में मोटे अनाज को जोड़ने से बच्चों का आहार और अधिक पौष्टिक हो जाएगा।

 क्यों जरूरी है मिलेट्स?

मोटे अनाज यानी मिलेट्स में कैल्शियम, आयरन, फाइबर और प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है। ये बच्चों की ऊर्जा, हड्डियों की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। यही कारण है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलेट्स को “सुपरफूड” के रूप में बढ़ावा दे रही हैं।

स्थानीय किसानों को भी होगा लाभ

इस पहल से जिले के किसान भी लाभान्वित होंगे। स्थानीय स्तर पर उगाए गए बाजरा, ज्वार और रागी की खरीद विद्यालयों के लिए की जाएगी। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और क्षेत्र में मिलेट्स उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा

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Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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