भदोही, 3 सितंबर 2024: उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. शुचिता चतुर्वेदी और श्रीमती निर्मला सिंह पटेल ने भदोही जिले में एक व्यापक निरीक्षण और समीक्षा अभियान का नेतृत्व किया। इस अभियान का उद्देश्य जिले में बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके हितों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों और योजनाओं की स्थिति का आकलन करना था।
निरीक्षण और दौरा:
सबसे पहले, डॉ. चतुर्वेदी और श्रीमती पटेल ने बीआरसी ज्ञानपुर स्थित कम्पोजिट विद्यालय का दौरा किया, जहां उन्होंने छात्रों के साथ बातचीत की। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं, शिक्षकों के व्यवहार, और अन्य शैक्षिक मुद्दों पर विस्तार से जानकारी ली। इस बातचीत के दौरान, बच्चों ने अपने अनुभव साझा किए और आयोग के सदस्यों ने उनकी जरूरतों और चिंताओं को समझने का प्रयास किया।
इसके बाद, उन्होंने सम्हई राजपुतानी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कुपोषित बच्चों की संख्या, गोद भराई और अन्नप्राशन कार्यक्रमों की स्थिति, और पोषण ट्रैकर पर डेटा फीडिंग के बारे में पूछताछ की। निरीक्षण के दौरान, चार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित अनुपस्थिति की शिकायतें मिलीं, जिस पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा, आयोग के सदस्यों ने करूणालय संस्था हरियांव पोषण पुनर्वास केंद्र का भी निरीक्षण किया। इस केंद्र का उद्देश्य कुपोषित बच्चों के पोषण स्तर को सुधारना है, और यहां के कार्यों की समीक्षा की गई कि कैसे यह केंद्र बच्चों की स्वास्थ्य सुधार में योगदान दे रहा है।
समीक्षा बैठक:
इन स्थलीय निरीक्षणों के पश्चात, विकास भवन सभागार में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी डॉ. शिवाकांत द्विवेदी ने की, जिसमें महिला एवं बाल कल्याण, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, अल्पसंख्यक कल्याण, और पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान, डॉ. चतुर्वेदी और श्रीमती पटेल ने विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने महिला एवं बाल कल्याण विभाग के तहत कोविड-19 से प्रभावित बच्चों के लिए चलाई जा रही स्पॉसरशिप योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मिशन वात्सल्य योजना, और चाइल्ड हेल्पलाइन योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देश दिया कि इन योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार हो ताकि अधिक से अधिक बच्चों और उनके परिवारों को इसका लाभ मिल सके।
समाज कल्याण विभाग की समीक्षा में, दो आश्रम पद्धति से संचालित छात्रावासों की स्थिति, शिक्षकों की संख्या, और आवासीय सुविधाओं की जांच की गई। चाइल्ड केयर समन्वय के तहत, बच्चों की तस्करी और भिक्षावृत्ति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।
शिक्षा विभाग के प्रभारी बीएसए से यह जानकारी ली गई कि आरटीई पोर्टल के अंतर्गत जिले में कितने प्राइवेट स्कूल पंजीकृत हैं, कितने बच्चों ने आवेदन किया है, और उनमें से कितनों का चयन और दाखिला हुआ है। यह जानकारी दी गई कि कुल 6606 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 4448 सत्यापित किए गए और 2035 बच्चों को चार चरणों में विभिन्न विद्यालयों में दाखिला दिया गया।
अल्पसंख्यक विभाग की समीक्षा में, जिले में संचालित मदरसों की स्थिति पर चर्चा हुई। बताया गया कि कुल 61 मदरसे हैं, जिनमें 7 एडेड मदरसे और लड़कियों के लिए दो आवासीय मदरसे शामिल हैं। आयोग ने बाल कल्याण समिति की टीम को निर्देश दिया कि वे आवासीय मदरसों में जाकर लड़कियों से बातचीत करें और उनकी काउंसलिंग करें ताकि उनकी समस्याओं को समझा जा सके और उन्हें सही मार्गदर्शन दिया जा सके।
श्रम विभाग की समीक्षा के दौरान, विभाग द्वारा समय-समय पर संचालित अभियानों और छापों के अंतर्गत कितने बाल श्रमिक बच्चों का रेस्क्यू किया गया, और श्रम विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में, सीएमओ से रेडियोलाजिस्ट, पॉक्सो मेडिकल टेस्ट, एनआरसी में बच्चों की भर्ती, और उनके स्वास्थ्य के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी ली गई।
पुलिस विभाग की भूमिका:
पुलिस विभाग की समीक्षा के दौरान, अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस वर्ष पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत कुल 38 मामलों में 34 में सजा दिलाई गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पॉक्सो और लड़कियों से जुड़े मामलों की जांच प्रभावी ढंग से की जाती है, और इस प्रकार के सभी केस दर्ज किए जाते हैं। आयोग ने मानव तस्करी, गुमशुदा बच्चों, और अन्य संबंधित मुद्दों पर भी जानकारी ली और पुलिस विभाग को बच्चों के अधिकारों की रक्षा में और अधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर:
बैठक के समापन पर, डॉ. चतुर्वेदी और श्रीमती पटेल ने स्पष्ट किया कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करना सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बाल हितों के मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी विभागों को अपने-अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा से पालन करना चाहिए।
उपस्थित अधिकारी:
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष पीसी उपाध्याय, सदस्य संगीता खन्ना, प्रेम शंकर त्रिपाठी, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक, जिला विकास अधिकारी ज्ञानप्रकाश, जिला प्रोबेशन अधिकारी शत्रुघ्न कन्नौजिया, जिला समाज कल्याण अधिकारी मीना श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम अधिकारी मंजू वर्मा, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रमेश चंद्र, डीआईओएस अंशुमान, और जिला सूचना अधिकारी डॉ. पंकज कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
इस तरह, भदोही जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा के लिए आयोग द्वारा उठाए गए ये कदम भविष्य में बच्चों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध वातावरण बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।
मुख्य संपादक – शिवशंकर दुबे
edited by : आशु झा
भारत क्रांति न्यूज़
Author: Bharat Kranti News
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