भदोही: रात में खुले में बंधे पशु पड़ रहे बीमार, अस्पतालों में बढ़ी संख्या; रोजाना पहुंच रहे 300 मवेशी
ज्ञानपुर (भदोही)। मौसम में बदलाव और रात में बढ़ती ठंड का असर अब पशुओं की सेहत पर भी पड़ने लगा है। जिले के पशु अस्पतालों में बीमार मवेशियों की संख्या बढ़ने लगी है। पशुपालक अपने पशुओं का इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिले के नौ पशु अस्पतालों और 11 उपकेंद्रों पर इन दिनों ओपीडी की संख्या करीब 300 तक पहुंच गई है।
पशु चिकित्सकों के अनुसार, पशुओं के बीमार होने का प्रमुख कारण रात में उन्हें खुले आसमान के नीचे बांधना है। इन दिनों दिन में तेज धूप, रात में सर्द हवाएं और सुबह हल्का कोहरा पड़ रहा है। तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण पशु बीमार हो रहे हैं। ठंड के चलते उनमें सुस्ती भी देखने को मिल रही है। धूप निकलने के बाद ही उनकी सक्रियता बढ़ती है।
सर्दी-जुकाम, बुखार और निमोनिया के बढ़े मामले
पशु चिकित्सकों के मुताबिक, इन दिनों सर्दी-जुकाम, बुखार, निमोनिया और दस्त से पीड़ित मवेशियों के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। बीमारी के कारण पशु चारा खाना भी कम कर देते हैं, जिससे उनकी सेहत प्रभावित होती है।
जिले में करीब ढाई लाख पशुपालक और साढ़े चार लाख मवेशी हैं। इसके अलावा जिले में तीन स्थायी और 29 अस्थायी गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें करीब छह हजार गोवंश संरक्षित हैं। इसके बावजूद अधिकांश गांवों में पशुपालक अपने मवेशियों को घर के बाहर या छप्पर के नीचे खुले में बांध देते हैं। रात में ठंड बढ़ने से ऐसे पशुओं के बीमार होने का खतरा अधिक रहता है।
ज्ञानपुर पशु अस्पताल की ओपीडी में बढ़े मरीज
ज्ञानपुर सदर अस्पताल के पशु चिकित्सक डॉ. जनार्दन मौर्य ने बताया कि पहले प्रतिदिन ओपीडी में 10 से 15 पशु इलाज के लिए आते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 30 से अधिक हो गई है। खुले में बंधे रहने और ठंडी जमीन पर बैठने से पशुओं की सेहत प्रभावित हो रही है। इससे उनके थन में सूजन और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
ठंड से बचाव के लिए पशुपालक बरतें सावधानी
पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को सलाह दी है कि रात में मवेशियों को खुले आसमान के नीचे बांधने से बचें। उन्हें बंद कमरे या पर्दे से ढकी सुरक्षित जगह पर रखें। जमीन पर सूखा पुआल, भूसा या बोरा बिछाएं, ताकि पशुओं को ठंड से बचाया जा सके। इसके साथ ही उन्हें साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराएं। पशुओं में सुस्ती, बुखार, दस्त या चारा कम खाने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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