आंधी-बारिश में जिला अस्पताल की बिजली गुल, मोबाइल की रोशनी में चला इलाज
भदोही। जिले में बुधवार शाम आई तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्थाओं की भी पोल खोल दी। जिला अस्पताल की बिजली अचानक गुल हो जाने से मरीजों और तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। करीब आधे घंटे तक अस्पताल अंधेरे में डूबा रहा। इस दौरान हड्डी वार्ड में डॉक्टरों ने मोबाइल की फ्लैशलाइट के सहारे मरीजों का इलाज और जांच की।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम के समय मौसम अचानक खराब हुआ और तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। कुछ ही देर में जिला अस्पताल की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। बिजली कटते ही वार्डों में अंधेरा फैल गया और मरीजों में बेचैनी बढ़ गई। कई तीमारदार अपने मोबाइल की टॉर्च जलाकर मरीजों के पास खड़े रहे।
उस समय आर्थो सर्जन डॉ. संतोष चौधरी वार्ड में मरीजों का राउंड ले रहे थे। बिजली जाने के बावजूद उन्होंने मोबाइल की रोशनी में मरीजों की जांच जारी रखी। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने किसी तरह व्यवस्था संभालते हुए मरीजों को राहत देने की कोशिश की।
शहर के वार्ड संख्या 19 निवासी विक्रांत सिंह ‘हैप्पी’ ने अस्पताल में बिजली कटौती के दौरान का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अंधेरा होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। अस्पताल परिसर में उस समय कोई सुरक्षाकर्मी भी नजर नहीं आया।
लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर महीने जनरेटर के लिए हजारों रुपये के डीजल खर्च का दावा किया जाता है। इसके अलावा अस्पताल भवन पर हाल ही में सोलर प्लांट भी लगाया गया है, लेकिन आपात स्थिति में उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल सका। बिजली कटौती के दौरान पूरा परिसर अंधेरे में डूबा रहा।
हालांकि इमरजेंसी वार्ड में इनवर्टर बैकअप होने के कारण वहां सेवाएं बाधित नहीं हुईं। गंभीर मरीजों का इलाज सामान्य रूप से चलता रहा।
मामले में सीएमएस डॉ. एसके यादव ने कहा कि तेज आंधी के कारण कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी। अस्पताल में इमरजेंसी सेवाओं के लिए जनरेटर और इनवर्टर की व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए सुरक्षाकर्मी दोनों परिसरों में 24 घंटे तैनात रहते हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई 2025 में बलिया जिला अस्पताल और सोनबरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी बिजली गुल होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वहां जनरेटर खराब होने के कारण डॉक्टरों को टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ा था। ऑक्सीजन प्लांट बंद होने से एक बुजुर्ग महिला की हालत भी गंभीर हो गई थी।
जिला अस्पताल की यह घटना एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की तैयारियों और आपातकालीन बैकअप सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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