कैदी नंबर 425 और 426 बने आज़म ख़ान–अब्दुल्ला आज़म; रामपुर जेल की बैरक नंबर-1 में रह रहे कई कैदियों के साथ, कोर्ट ने दी साथ रखने की अनुमति
दो पैन कार्ड फर्जीवाड़ा मामले में सात साल की सजा मिलने के बाद समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आज़म ख़ान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म रामपुर जिला कारागार में बंद हैं। जेल प्रशासन ने दोनों को पहचान के लिए क्रमशः कैदी नंबर 425 और 426 आवंटित कर दिए हैं। जेल मैनुअल के अनुसार दोनों को सजायाफ्ता कैदियों की निर्धारित वर्दी भी सौंप दी गई है।
बैरक नंबर-1 में सामान्य कैदियों के साथ रखा गया
जेल प्रशासन के मुताबिक किसी भी नए सजायाफ्ता कैदी को पहले 10 दिन तक सामूहिक बैरक में ही रखा जाता है। इसी नियम के तहत आज़म और अब्दुल्ला को बैरक नंबर-1 में कई अन्य बंदियों के साथ रखा गया है।
जेल अधीक्षक राजेश यादव ने बताया कि दोनों कैदियों को वही भोजन, नाश्ता और दैनिक जरूरतें मिल रही हैं जो जेल मैनुअल में अन्य कैदियों के लिए निर्धारित हैं।
कोर्ट ने राजनीतिक कैदियों की सुविधाएँ देने का आदेश दिया
एमपी–एमएलए स्पेशल कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि आज़म और उनके बेटे को राजनीतिक बंदियों को मिलने वाली सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। राजनीतिक कैदियों को मिलने वाली मूल सुविधाएँ—
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अलग बैरक
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कंबल
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मच्छरदानी
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टेबल और कुर्सी
कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि दोनों कैदियों को रामपुर जेल से किसी अन्य जेल में स्थानांतरित करना हो तो जेल प्रशासन को पहले कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। यह व्यवस्था मनमाने शिफ्टिंग पर रोक के रूप में देखी जा रही है।
साथ रखने की अनुमति भी दी
आज़म ख़ान की ओर से दाखिल प्रार्थनापत्र में आग्रह किया गया था कि उनके बेटे को भी उनके साथ रखा जाए, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब पिता-पुत्र दोनों को एक ही बैरक और आगे चलकर एक ही राजनीतिक बंदी बैरक में शिफ्ट करने की प्रक्रिया चलाई जा सकती है।
जेल प्रशासन की तैयारी शुरू
जेल अधीक्षक राजेश यादव ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद राजनीतिक कैदियों की सुविधा के अनुरूप बैरक तैयार की जा रही है।
उन्होंने बताया कि यदि शासन से विशेष निर्देश आते हैं तो अतिरिक्त सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँगी।
जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने कहा—
“शासन से जो आदेश आएंगे, उसी के अनुसार जेल शिफ्टिंग या सुविधाओं से संबंधित कार्रवाई की जाएगी।”
आज़म ख़ान: कभी ‘मिनी डिप्टी सीएम’, आज कई मामलों में सजा
रामपुर से 10 बार विधायक, यूपी में चार बार कैबिनेट मंत्री और लोकसभा–राज्यसभा सदस्य रहे आज़म ख़ान को कभी यूपी का मिनी डिप्टी सीएम भी कहा जाता था।
लेकिन सरकार बदलने के बाद उनके खिलाफ एक के बाद एक 100 से अधिक मामले दर्ज हुए। इनमें से अब तक 7 मामलों में सजा हो चुकी है।
दो पैन कार्ड फर्जीवाड़ा केस में उन्हें और उनके बेटे को हाल ही में 7 साल की कैद मिली, जिसके बाद दोनों को रामपुर जेल लाया गया।
कैदी नंबर का विवाद? जेल की सफाई
राजनीतिक चर्चाओं के बीच जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 425 और 426 कैदी नंबर विशेष व्यवस्था नहीं, बल्कि जेल रजिस्टर की क्रमवार प्रविष्टि के आधार पर दिए गए सामान्य नंबर हैं।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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