रायबरेली में भाजपा नेता रिंकू सिंह की अभद्रता पर घिरी राजनीति और चिकित्सा व्यवस्था
रायबरेली में भाजपा नेता रिंकू सिंह के द्वारा चिकित्सक डॉक्टर प्रभात मिश्रा को अपमानित करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 30 जनवरी 2025 की रात की इस घटना में, डॉक्टर प्रभात मिश्रा ने दो घायल युवकों का इलाज किया और गंभीर चोटों को देखते हुए उन्हें रायबरेली रिफर कर दिया। इन युवकों पर आरोप था कि उन्हें रिंकू सिंह के समर्थकों ने पीटा था, और यही कारण था कि भाजपा नेता इस रिफर को लेकर नाराज हो गए थे।
नेता रिंकू सिंह ने चिकित्सक से भिड़ते हुए उन्हें “पंडित” कहकर गालियाँ दीं, और इस मुद्दे पर रायबरेली के सीओ और मंत्री दिनेश सिंह के सामने अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने डॉक्टर को अपमानित करने के साथ-साथ यह भी कहा कि उन्होंने सीओ से रिंकू सिंह का नाम लिया था और सीएमओ से उनके बारे में सवाल पूछा था। चिकित्सक ने इस मामले पर CMO रायबरेली से शिकायत दर्ज करवाई है और उनके मुताबिक, यह वार्तालाप रिकॉर्डिंग में मौजूद है जिसमें डॉक्टर ने आदरपूर्वक “सर-सर” कहा था।
यह घटना खासतौर पर संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि इसमें एक चिकित्सक को अपमानित करने का मामला उठाया गया है, जोकि न केवल एक चिकित्सा पेशेवर का अपमान है, बल्कि अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों के विश्वास को भी प्रभावित कर सकता है।
इस विवाद के बाद, भाजपा के नेताओं की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। इस पूरे मामले के बाद, रायबरेली जिले में स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर चर्चा और भी गर्म हो गई है। चिकित्सक ने साफ कहा है कि उन्होंने रिंकू सिंह की आपत्ति के बावजूद उनका इलाज किया, लेकिन उनकी गालियों और अपमानजनक शब्दों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
रायबरेली के नागरिक और राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के बर्ताव से न केवल कानून और व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होती है, बल्कि यह दर्शाता है कि सत्ता और राजनीति में आने वाले नेता अपनी जिम्मेदारियों से किनारे हटकर केवल अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हैं।
सिस्टम में सुधार की मांग: इस मामले के बाद चिकित्सकों, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और नागरिकों ने अपनी आवाज उठाई है। वे चाहते हैं कि नेताओं को अपने शब्दों और व्यवहार पर नियंत्रण रखना चाहिए, ताकि समाज में एक स्वस्थ और सम्मानजनक माहौल बना रहे।
चिकित्सकों की सुरक्षा: इस घटना ने चिकित्सा समुदाय के अंदर भी चिंता को जन्म दिया है। चिकित्सकों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएँ उनके लिए डर और असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं। इसलिए वे मांग कर रहे हैं कि उन्हें सुरक्षा और सम्मान मिले ताकि वे अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।
कार्रवाई की उम्मीद: फिलहाल, इस पूरे मामले की जांच जारी है, और यह देखा जाएगा कि संबंधित अधिकारियों और नेताओं पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
(रिपोर्ट: आशु झा, संपादक: अखिलेश दूबे(गुड्डू पंडित ) , भारत क्रांति न्यूज)
Author: Bharat Kranti News
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