राष्ट्रीय नदी गंगा को प्रदूषण से बचाने की अपील: महाकुंभ के महापर्व में उठाएं ठोस कदम
प्रयागराज में होने वाला महाकुंभ न केवल विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना हम सभी का कर्तव्य है कि मां गंगा का पवित्र जल प्रदूषण से मुक्त रहे। गंगा, जिसे करोड़ों लोग मां के रूप में पूजते हैं, अब प्रदूषण के कारण संकट में है।
महाकुंभ में भाग लेने वाले संत-महात्माओं, कल्पवासियों और तीर्थयात्रियों से अपील की गई है कि वे गंगा में ऐसी कोई वस्तु न डालें जो इसे प्रदूषित करे। यह हमारी जिम्मेदारी है कि गंगा को बचाने के लिए कुछ ठोस कदम उठाएं।
प्रदूषण रोकने के लिए पालन करें ये नियम:
- माला, फूल और हवन सामग्री न डालें: धार्मिक अनुष्ठानों के बाद इन वस्तुओं को गंगा में प्रवाहित करने के बजाय निर्धारित स्थानों पर रखें।
- प्लास्टिक और थर्मोकोल का उपयोग न करें: ये सामग्रियां न केवल गंगा के जल को दूषित करती हैं, बल्कि जल जीवन के लिए भी हानिकारक हैं।
- साबुन और डिटर्जेंट का उपयोग न करें: गंगा के किनारे स्नान करते समय साबुन और डिटर्जेंट का उपयोग करने से बचें।
- कपड़े धोने और कुल्ला करने से बचें: गंगा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए इन आदतों को बदलना आवश्यक है।
- धार्मिक ग्रंथ और पुराने कागजात न डालें: इन्हें गंगा में प्रवाहित करने के बजाय सुरक्षित स्थानों पर रखें।
मां गंगा की चेतावनी:
मां गंगा के जल को प्रदूषण से बचाने के लिए अगर हम आज ठोस कदम नहीं उठाते, तो इसका परिणाम भविष्य में भयावह हो सकता है। मां गंगा की ओर से यह संदेश है, “अगर आप मुझे यूं ही प्रदूषित करते रहेंगे, तो मैं एक दिन धरती से विलुप्त हो जाऊंगी। तब आप अपने पूर्वजों की पूजा और श्रद्धा के लिए अमृत जल के लिए तरस जाएंगे।”


सरकार और सामाजिक संगठनों की पहल:
“नमामी गंगे” और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन जैसे कार्यक्रम इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। मेला प्राधिकरण, नगर निगम और सृष्टि वेस्ट मैनेजमेंट जैसे संगठन भी महाकुंभ के दौरान गंगा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
सृष्टि वेस्ट मैनेजमेंट का प्रयास:
सृष्टि वेस्ट मैनेजमेंट ने प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान गंगा को स्वच्छ रखने के लिए कई प्रगतिशील कदम उठाए हैं। उनके ब्रांड एम्बेसेडर राजेंद्र कुमार तिवारी ने कहा, “गंगा को स्वच्छ बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। यह न केवल धार्मिक, बल्कि हमारे अस्तित्व के लिए भी आवश्यक है।”
संतों और श्रद्धालुओं की भूमिका:
महाकुंभ में आए श्रद्धालुओं और संत-महात्माओं से यह अपील की गई है कि वे गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने में अपनी भूमिका निभाएं। यह न केवल एक धर्म का कर्तव्य है, बल्कि यह सभी भारतीयों की नैतिक जिम्मेदारी भी है।
गंगा बचाने का संकल्प लें:
आइए, इस महापर्व के अवसर पर हम सब मिलकर गंगा को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने का संकल्प लें। गंगा हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है। इसे बचाना हम सभी का दायित्व है।
(रिपोर्ट: आशु झा, संपादक:अखिलेश दुबे (गुड्डू पंडित) , भारत क्रांति न्यूज)
Author: Bharat Kranti News
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