भदोही में पांच महीने में 24 नए अस्पताल खुले, एक भी निजी एंबुलेंस का नहीं हुआ पंजीकरण

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पांच महीने में 24 नए अस्पताल खुले, एक भी निजी एंबुलेंस का नहीं हुआ पंजीकरण

भदोही। जिले में निजी अस्पतालों और एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। इस साल 1 मई से 23 सितंबर 2026 के बीच जिले में 24 नए अस्पताल खुले, लेकिन इस अवधि में एक भी निजी एंबुलेंस का पंजीकरण नहीं हुआ। एआरटीओ कार्यालय में वर्तमान में महज 36 निजी एंबुलेंस पंजीकृत हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग और अन्य स्रोतों के अनुसार जिले की सड़कों पर 60 से अधिक निजी एंबुलेंस संचालित होने की बात सामने आ रही है।

जिले में कुल 140 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम पंजीकृत हैं। इनमें करीब 104 अस्पताल ऐसे हैं, जो अनुबंधित या उधार की एंबुलेंस व्यवस्था पर निर्भर हैं। नियमों के अनुसार अस्पताल के पंजीकरण के समय एंबुलेंस की व्यवस्था होना अथवा किसी संस्था से एंबुलेंस सेवा के लिए अनुबंध होना जरूरी है।

20 लाख की आबादी पर 58 एंबुलेंस

करीब 20 लाख की आबादी वाले जिले में जिला अस्पताल समेत सरकारी क्षेत्र में 230 और निजी क्षेत्र में 140 अस्पताल बताए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास 102 और 108 सेवा की 38 एंबुलेंस हैं। इसके अलावा पांच एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस हैं। इस तरह सरकारी व्यवस्था में कुल 43 एंबुलेंस हैं।

वहीं, एआरटीओ कार्यालय में 28 एंबुलेंस अस्पतालों के नाम और आठ संस्थागत नाम से पंजीकृत हैं। निजी क्षेत्र में पंजीकृत एंबुलेंस की कुल संख्या 36 है।

पांच महीने में खुले 24 अस्पताल, नहीं हुआ एक भी पंजीकरण

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 1 मई से 23 सितंबर 2026 तक जिले में 24 नए अस्पताल खुले हैं। विभागीय टीम ने इन अस्पतालों का निरीक्षण और सत्यापन किया है। इनमें 23 अस्पताल 10 से 15 बेड क्षमता वाले हैं। सबसे अधिक नए अस्पताल भदोही, सुरियावां और गोपीगंज क्षेत्र में खुले हैं।

हालांकि, एआरटीओ कार्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार इस अवधि में एक भी नई निजी एंबुलेंस का पंजीकरण नहीं हुआ। इससे अस्पतालों की एंबुलेंस व्यवस्था और पंजीकरण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मानकों के विपरीत एंबुलेंस चलने की शिकायत

बताया जा रहा है कि जिले में कई निजी एंबुलेंस बिना जरूरी मानकों के संचालित हो रही हैं। इनमें ऑक्सीजन की सुविधा, आवश्यक मेडिकल उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई जगह मरीजों को चालक के भरोसे रेफर किए जाने की बात भी कही जा रही है।

कुछ पुराने वाहनों को मॉडिफाई कर एंबुलेंस के रूप में इस्तेमाल किए जाने की भी शिकायत है। आरोप है कि मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर निजी एंबुलेंस संचालक मनमाना किराया वसूलते हैं।

सरकारी एंबुलेंस की फिटनेस पर भी सवाल

सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था को लेकर भी कुछ घटनाएं सामने आई हैं। सावन में लालानगर टोल प्लाजा के पास सड़क हादसे में घायल एक कांवड़िए को मौके पर मौजूद एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन एंबुलेंस चालू नहीं हो सकी। इसके बाद घायल को निजी वाहन से सीएचसी गोपीगंज पहुंचाया गया।

वर्ष 2025 में जिला अस्पताल से रेफर किए गए एक मरीज को ले जाने के लिए भी एंबुलेंस समय पर चालू नहीं हो सकी थी। बाद में दूसरी एंबुलेंस से मरीज को भेजा गया।

एंबुलेंस पंजीकरण के लिए ये हैं नियम

निजी एंबुलेंस के पंजीकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी है। इसके लिए सीएमओ से एनओसी प्राप्त करनी होती है। वाहन का व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकरण होना चाहिए। इसके बाद एआरटीओ कार्यालय की ओर से फिटनेस जांच की जाती है।

एंबुलेंस में मरीज को लेटाने की व्यवस्था, ऑक्सीजन सहित आवश्यक लाइफ सपोर्ट उपकरण और अन्य सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाती है।

सीएमओ डॉ. एसके चक ने बताया कि जिले के सभी निजी अस्पतालों का किसी न किसी संस्था से अनुबंध कराया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को एंबुलेंस उपलब्ध हो सके। अनुबंध के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है।

वहीं, एआरटीओ राम सिंह ने बताया कि एआरटीओ कार्यालय में आठ संस्थागत और 28 अस्पतालों के नाम से एंबुलेंस पंजीकृत हैं। समय-समय पर अभियान चलाकर इन वाहनों की जांच की जाती है।

Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

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