एनीमिया से जूझ रही गर्भवती महिलाओं को मुफ्त लगेगा एफसीएम इंजेक्शन, एक डोज में बढ़ेगा हीमोग्लोबिन
ज्ञानपुर। एनीमिया से जूझ रही हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाली गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राहत की पहल की है। अब ऐसी महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन निशुल्क लगाया जाएगा। शासन की ओर से जिले में पहली बार एफसीएम इंजेक्शन की करीब 6000 डोज भेजी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक इंजेक्शन से हीमोग्लोबिन में करीब ढाई ग्राम तक बढ़ोतरी हो सकती है।
बाजार में करीब 5000 रुपये कीमत वाला यह इंजेक्शन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं को मुफ्त लगाया जाएगा। खून की कमी वाली गर्भवती महिलाओं में प्रसव के दौरान जटिलताओं का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में एफसीएम इंजेक्शन से एनीमिया को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जिले में 1425 गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में
जिले में हर महीने की 1, 9, 16 और 24 तारीख को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) दिवस आयोजित किया जाता है। इस दौरान गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच के साथ हीमोग्लोबिन समेत अन्य जांचें की जाती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में जिले में करीब 1425 गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी की श्रेणी में हैं। वहीं जिले में करीब 70 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन सात ग्राम के आसपास बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त हीमोग्लोबिन होना जरूरी है।
जिला अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति ने बताया कि जिन गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन सात ग्राम से कम है, उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एफसीएम इंजेक्शन दिया जाएगा। इससे हीमोग्लोबिन में करीब ढाई ग्राम तक बढ़ोतरी हो सकती है।
इन अस्पतालों में पहुंची एफसीएम की खेप
शासन की ओर से जिले के चिन्हित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर एफसीएम इंजेक्शन भेजे गए हैं।
- महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय: 448
- महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय (एमबीएस), भदोही: 100
- सीएचसी डीघ: 150
- एफआरयू औराई: 110
बाकी इंजेक्शन ड्रग वेयरहाउस में सुरक्षित रखे गए हैं और जरूरत के अनुसार चिन्हित केंद्रों पर भेजे जाएंगे।
पांच इंजेक्शन की जगह अब एक डोज
जिला अस्पताल के स्त्री रोग एवं प्रसूता विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में खून की कमी एक बड़ी समस्या है। एफसीएम इंजेक्शन की खासियत यह है कि पहले आयरन सुक्रोज के लिए कई डोज लगानी पड़ती थीं, जबकि एफसीएम में चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार एक ही डोज में पूरा आयरन कोर्स दिया जा सकता है।
यह इंजेक्शन गर्भावस्था के 12 सप्ताह बाद से 34 सप्ताह के बीच चिकित्सक की सलाह पर लगाया जा सकता है। जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन सात ग्राम से कम है, उन्हें जांच और चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर यह इंजेक्शन दिया जाएगा।
एनीमिया दूर होने से कम होंगी प्रसव संबंधी जटिलताएं
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी पाठक ने बताया कि एनीमिया दूर होने से समय से पहले प्रसव, कम वजन के बच्चे के जन्म और प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव जैसी जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है। गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवा या इंजेक्शन लेना चाहिए।
जिला अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. निलमा धवन ने बताया कि शरीर में खून की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं में थकान, चक्कर आना
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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