Tata Consultancy Services (टीसीएस) नासिक प्रकरण: हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर दफ्तर में घुसी पुलिस, यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण के कथित नेटवर्क का खुलासा
नासिक। टीसीएस की नासिक इकाई में महिला कर्मचारियों के साथ कथित यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के प्रयासों से जुड़े मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच लगातार नए-नए चौंकाने वाले खुलासे कर रही है। पुलिस द्वारा चलाए गए गुप्त अभियान, डिजिटल साक्ष्यों की रिकवरी और आरोपियों के बीच संदिग्ध संपर्कों ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर और संगठित साजिश की दिशा में मोड़ दिया है। 🚨
हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर दफ्तर में दो सप्ताह तक चली गुप्त जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फरवरी माह में गुप्त अभियान चलाया। इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में टीसीएस कार्यालय में लगभग दो सप्ताह तक तैनात किया गया।
इस दौरान कर्मचारियों के व्यवहार, आपसी बातचीत और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की गई। प्राप्त इनपुट के आधार पर पुलिस को कई महत्वपूर्ण संकेत मिले, जिसके बाद इस कथित नेटवर्क का पर्दाफाश संभव हो सका।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन बेहद संवेदनशील और रणनीतिक था, क्योंकि बिना किसी संदेह के कार्यालय के भीतर की वास्तविक स्थिति जानना जरूरी था।
⚠️ महिला कर्मचारियों से शारीरिक संबंध बनाने और धार्मिक दबाव के आरोप
पीड़ित महिला कर्मचारियों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा:
- शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया गया
- नमाज पढ़ने के लिए कहा गया
- रोजा रखने के लिए प्रेरित/दबाव डाला गया
- मांसाहार अपनाने के लिए मजबूर किया गया
- धर्म परिवर्तन के लिए मानसिक दबाव बनाया गया
इन आरोपों की पुष्टि के लिए एसआईटी डिजिटल साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, ईमेल और चैट डेटा की गहन जांच कर रही है।
एचआर मैनेजर निदा खान पर शिकायत दबाने का आरोप
एसआईटी जांच में सामने आया है कि एचआर मैनेजर निदा खान ने कथित तौर पर कर्मचारियों द्वारा भेजे गए लगभग 70 शिकायत संदेशों को नजरअंदाज किया।
जांच एजेंसियों के अनुसार:
- उन्होंने पीड़ितों को मामला भूल जाने की सलाह दी
- शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की
- आंतरिक शिकायत समिति की सदस्य होने के बावजूद निष्क्रिय रहीं
जांच में उनके संभावित विदेशी संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है। फिलहाल वे फरार बताई जा रही हैं और पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
78 संदिग्ध कॉल, ईमेल और चैट रिकॉर्ड बरामद
एसआईटी को आरोपियों के बीच हुई लगभग 78 संदिग्ध कॉल, ईमेल और चैट रिकॉर्ड मिले हैं।
जांच में सामने आया है कि:
- कई व्हाट्सएप ग्रुप सक्रिय थे
- सहकर्मियों को लक्ष्य बनाकर चर्चा की जाती थी
- गतिविधियों की योजना बनाई जाती थी
- डिलीट किए गए चैट को फॉरेंसिक तकनीक से रिकवर किया जा रहा है
डिजिटल साक्ष्य इस बात की ओर संकेत करते हैं कि कार्यालय के भीतर एक से अधिक स्तर पर नेटवर्क संचालित हो रहा था।
विदेश से जुड़े संभावित लिंक की भी जांच
एसआईटी को एक व्हाट्सएप चैट में मलेशिया के एक संदिग्ध उपदेशक से जुड़े लिंक भी मिले हैं।
इसके बाद जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि:
- क्या आरोपियों को विदेश से आर्थिक सहायता मिली?
- क्या किसी कट्टरपंथी संगठन से संपर्क था?
- क्या यह संगठित नेटवर्क का हिस्सा था?
नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने कहा है कि यदि विदेशी फंडिंग या संगठन से संबंध के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो आरोपियों पर और सख्त धाराएं लगाई जाएंगी।
अब तक 12 कर्मचारियों की पहचान, कई गिरफ्तार
एसआईटी ने अब तक इस कथित नेटवर्क में शामिल 12 कर्मचारियों की पहचान की है।
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
- आसिफ अंसारी
- तौफीक अत्तर
- दानिश शेख
- रजा मेमन
- शाहरुख कुरैशी
- शफी शेख
इनके अलावा अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है।
एजीएम अश्विनी चैनानी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में
मामले में टीसीएस की एजीएम अश्विनी अशोक चैनानी को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार:
- मामला दर्ज होने के बाद भी वे आरोपी दानिश शेख के संपर्क में थीं
- गिरफ्तारी से पहले उन्होंने आरोपी से फोन पर बात की थी
- कॉल और ईमेल रिकॉर्ड के आधार पर मिलीभगत की जांच जारी है
2022 से चल रहा था कथित रैकेट, अब तक 9 एफआईआर दर्ज
जांच में सामने आया है कि यह कथित नेटवर्क वर्ष 2022 से सक्रिय था।
अब तक:
- कुल 9 एफआईआर दर्ज
- 1 मामला देवलाली कैंप थाना
- 8 मामले मुंबई नाका थाना
इन मामलों में उत्पीड़न, मानसिक यातना और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप शामिल हैं।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने बनाई चार सदस्यीय जांच समिति
घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने चार सदस्यीय तथ्य-खोज समिति गठित की है।
समिति में शामिल हैं:
- बॉम्बे हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस साधना जाधव
- पूर्व हरियाणा डीजीपी बी.के. सिन्हा
- सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा
- वरिष्ठ समन्वयक लीलाबती
समिति 17 अप्रैल को संबंधित इकाई का दौरा करेगी और:
- पीड़ितों से बातचीत करेगी
- पुलिस अधिकारियों से जानकारी लेगी
- कंपनी प्रतिनिधियों से जवाब मांगेगी
- सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेगी
रिपोर्ट 10 कार्य दिवसों के भीतर आयोग को सौंपी जाएगी।
जांच अभी जारी, और खुलासों की संभावना
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में:
- नए आरोपियों की गिरफ्तारी
- वित्तीय लेन-देन का खुलासा
- विदेशी कनेक्शन की पुष्टि
- संगठित नेटवर्क की संरचना
जैसे कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
यह मामला अब सिर्फ एक कार्यालय तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि जांच एजेंसियां इसे संगठित आपराधिक नेटवर्क के संभावित एंगल से भी देख रही हैं।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।
