शहर से गांव तक प्रदर्शन, पुतला दहन कर जताया आक्रोश
ज्ञानपुर।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर सामान्य वर्ग का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। बृहस्पतिवार को जिले के शहरों से लेकर गांवों तक लोगों ने प्रदर्शन कर पुतला दहन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यूजीसी के नए नियमों से सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों और नागरिकों का उत्पीड़न बढ़ेगा। उनका कहना था कि यदि द्वेषवश कोई झूठी शिकायत दर्ज कराई गई, तो उसका सीधा खामियाजा सामान्य वर्ग के छात्रों को भुगतना पड़ेगा, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होगा।
बृहस्पतिवार दोपहर कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यूजीसी द्वारा बनाए गए नियम पूर्व शिक्षा विशेषज्ञों, राज्य सरकारों, विश्वविद्यालय समुदाय और छात्र प्रतिनिधियों से पर्याप्त परामर्श के बिना लागू किए गए हैं। इससे एकपक्षीय व्यवस्था और असंतुलन बढ़ने की आशंका है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
इस प्रदर्शन में शुभम पाठक, रजनीश पांडेय, विकास तिवारी, धीरज दुबे, विजय कुमार सिंह, शिवम उपाध्याय, पंकज शुक्ल, सुरेश शुक्ल, शिवांश पांडेय, सिद्धार्थ मिश्र, अनुज पाठक सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।
वहीं डीघ ब्लॉक के तुलसीकला गांव स्थित रामलीला मैदान में भी यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। विभिन्न गांवों से पहुंचे ग्रामीणों और छात्रों ने प्रधानमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने इन नियमों को छात्रहित और देशहित के विरुद्ध बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और पुनर्विचार की मांग की।
अधिवक्ता कमलाकांत और आलोक पांडेय ने कहा कि सवर्ण समाज पर थोपा गया यह कानून वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने इसे “मुगलों की तरह थोपा गया कानून” बताते हुए कहा कि यह समाज को बांटने का कार्य करेगा।
बृजकिशोर पांडेय ने आरोप लगाया कि इस तरह के नियमों के जरिए सवर्ण समाज को गुलामी की ओर धकेला जा रहा है।
इस मौके पर कमलाकांत पांडेय, रतन गुड्डू, आलोक अतुल पांडेय, धर्मेंद्र, आशीष, वेद प्रकाश, त्र्यंबक, महेश, बबलू, राजकिशोर, मुकेश, रितेश, ओम, अभिषेक, विनय शुक्ल, रत्नेश सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और छात्र मौजूद रहे।
यूजीसी नियमों पर विरोध की पृष्ठभूमि और आगे की रणनीति
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि यूजीसी द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए नियमों में शिकायतों की जांच प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं। इससे झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की संभावना बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों पर पड़ सकता है।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में पहले से ही अकादमिक दबाव और प्रतियोगिता अधिक है। ऐसे में बिना पर्याप्त सुरक्षा प्रावधानों के नए नियम लागू किए जाना मानसिक उत्पीड़न को बढ़ावा देगा। कई वक्ताओं ने यह भी कहा कि नियमों का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत रंजिश निकाली जा सकती है।
प्रदर्शन के दौरान यह मांग प्रमुख रूप से उठाई गई कि
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यूजीसी के नए नियमों को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए
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सभी वर्गों के शिक्षा विशेषज्ञों, विश्वविद्यालयों और छात्र संगठनों से व्यापक संवाद किया जाए
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झूठी शिकायतों से बचाव के लिए स्पष्ट और निष्पक्ष जांच प्रणाली बनाई जाए
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छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कानूनी संरक्षण सुनिश्चित किया जाए
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और यूजीसी ने इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा की गई।
स्थानीय प्रशासन ने ज्ञापन लेकर उच्चाधिकारियों तक बात पहुंचाने का आश्वासन दिया है, हालांकि प्रदर्शनकारी ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रखने के मूड में नजर आए।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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