ज्ञानपुर।
जिला अस्पताल ज्ञानपुर में सामने आई एंबुलेंस खराबी की घटना ने स्वास्थ्य विभाग की आपात सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। हादसे में घायल मरीज को समय पर रेफर न किया जा सका, जिससे उसके परिजनों में भारी आक्रोश देखने को मिला। मौजूद लोगों का कहना था कि अगर मरीज की हालत ज्यादा गंभीर होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
गोल्डन पीरियड में बाधा बनी खराब एंबुलेंस
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सड़क हादसों और गंभीर बीमारियों में शुरुआती 20 से 30 मिनट का समय ‘गोल्डन पीरियड’ माना जाता है। इसी दौरान मरीज को बेहतर इलाज मिल जाए तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है, लेकिन 25 मिनट तक एंबुलेंस को धक्का लगाना इस गोल्डन पीरियड को ही खत्म कर देता है।
तकनीकी जांच पर उठे सवाल
स्वास्थ्य विभाग की ओर से दावा किया जाता है कि सभी एंबुलेंस की नियमित सर्विस और तकनीकी जांच होती है, लेकिन मौके पर एंबुलेंस का स्टार्ट न होना इस दावे को झूठा साबित करता है। कर्मचारियों का कहना है कि कई एंबुलेंस बार-बार खराब हो रही हैं, लेकिन मजबूरी में उन्हें सड़क पर उतारना पड़ता है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जब हर महीने लाखों रुपये एंबुलेंस की सर्विस पर खर्च हो रहे हैं, तो फिर ऐसी बदहाल स्थिति क्यों है। लोगों ने एंबुलेंस सेवाओं की थर्ड पार्टी जांच और नियमित फिटनेस रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई है।
प्रशासन पर टिकी नजर
सीएमओ द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण और सर्विस रिपोर्ट के बाद अब प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी लापरवाही किसी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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