पूर्वांचल में न्यूरो और हाई-रिस्क दवाओं का संकट गहराया: 500 दवाएं बाजार से गायब, कंपनियों ने रोकी सप्लाई
हर दिन 10 करोड़ का नुकसान, मरीज और व्यापारी दोनों परेशान
वाराणसी। पूर्वांचल के सबसे बड़े दवा बाजार सप्तसागर में न्यूरोलॉजी, दिमाग, डिप्रेशन और हाई-रिस्क श्रेणी की दवाओं का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बाजार में यह स्थिति पहली बार देखने को मिल रही है, जब 500 से अधिक दवाएं—जिन पर गंभीर मरीजों का इलाज निर्भर करता है—लगभग खत्म हो गई हैं।
रिटेल मेडिकल स्टोरों को दैनिक आधार पर मिलने वाली सप्लाई का लगभग 25% हिस्सा बंद है। सप्लाई बंद होने की वजह है—
-
कोडीन कफ सिरप विवाद
-
ड्रग विभाग और पुलिस की लगातार छापेमारी
-
कंपनियों का नशे में दुरुपयोग की आशंका के चलते सप्लाई रोकना
इस बंदी का असर सिर्फ व्यापारियों पर ही नहीं, बल्कि हजारों मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजाना दवा की जरूरत होती है।
कंपनियों ने क्यों रोकी सप्लाई?
दवा व्यापारी बताते हैं कि कंपनियों को आशंका है कि कुछ दवाएं नशाखोरी में इस्तेमाल हो रही हैं। कोडीन सिरप के बड़े स्तर पर पकड़े जाने के बाद कंपनियों ने सुरक्षा और कानूनी जोखिम से बचने के लिए तत्काल वितरण रोक दिया।
संजय सिंह, महामंत्री, सप्तसागर दवा विक्रेता समिति:
“नारकोटिक श्रेणी की दवाएं कंपनियां सीधे स्टॉकिस्टों को नहीं दे रहीं। पूरी बैक-टू-बैक जांच, वेरिफिकेशन और दस्तावेज़ों के बाद ही थोड़ी बहुत दवा दी जा रही है। इससे रोजाना लगभग 10 करोड़ का कारोबार ठप हो गया है।”
दवा की कमी ने बढ़ाई चिकित्सकों की चिंता
न्यूरो, मनोचिकित्सा, दर्द प्रबंधन और क्रॉनिक मरीजों की दवा प्रिस्क्रिप्शन पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। डॉक्टर बताते हैं कि—
-
कई दवाएं मरीजों को लंबे समय तक निरंतर लेनी होती हैं।
-
अचानक बंद होने पर साइड इफेक्ट और दौरे (सीज़र्स) तक पड़ सकते हैं।
-
दवा बदलने से उनकी सेहत और ट्रीटमेंट दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
मरीजों की हालत गंभीर—दूकान-दूकान दवा की तलाश
⚫ केस 1: मिर्गी का मरीज
लहुराबीर निवासी मयंक कुमार की एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं खत्म हो गईं।
-
तीन दुकानों पर चक्कर लगाए
-
पांच में से दो दवाएं नहीं मिलीं
-
मिर्गी के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक
⚫ केस 2: बुजुर्ग महिला की दवा अधूरी
60 वर्षीय शीला देवी को न्यूरो और एंटी-डिप्रेशन दवाएं पिछले आठ महीनों से दी जा रही थीं।
-
इस बार 4 में से सिर्फ 2 दवाएं मिलीं
-
डॉक्टर ने दवा नहीं बदलने की सलाह दी है
कौन-कौन सी दवाएं बाजार से गायब?
कमी जिन दवाओं की सबसे अधिक है, वे मुख्य रूप से नारकोटिक, साइकोट्रॉपिक और न्यूरोलॉजी श्रेणी की हैं—
-
अल्प्राजोलाम, क्लोनाजेपाम, क्लोबाजाम (Anxiety/Seizures)
-
पिरासिटाम (Brain Health)
-
ट्रामाडोल, फेंटानिल (Painkiller)
-
मेथाडोन, बुप्रेनॉर्फिन (De-addiction Therapy)
-
नाइट्राजेपाम, लोराजेपाम, डायजेपाम (Sedative)
-
एस्सिटलोप्राम, एमिट्रिप्टिलीन (Depression/Anxiety)
-
नालट्रेक्सोन (Anti-addiction)
इन दवाओं के बिना कई मरीजों का इलाज पूरी तरह ठप पड़ गया है।
व्यापारियों की परेशानी: दवा नहीं तो ग्राहक नाराज़
दवा व्यापारियों की स्थिति भी कठिन है—
-
ग्राहक आते हैं, लेकिन दवा उपलब्ध न होने पर नाराज़गी झेलनी पड़ती है
-
नियमित ग्राहक दुकान बदलने लगे हैं
-
कई दवाओं की कमी के चलते आर्डर अटके पड़े हैं
-
नकदी प्रवाह (Cash Flow) पर भारी असर
सप्तसागर दवा व्यापारी समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार बताते हैं—
“न्यूरो दवाएं सस्ती होती हैं, लेकिन उपयोग में अत्यंत महत्वपूर्ण। छापेमारी के बाद स्टॉकिस्टों का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। कब सामान्य होगी सप्लाई, यह स्पष्ट नहीं है।”
प्रशासन का क्या कहना है?
ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली का बयान—
“अभी तक दवा कारोबारियों ने किसी तरह की दवा कमी की सूचना नहीं दी है। विभाग अपनी कार्रवाई कर रहा है। दवा व्यापारियों से इस मुद्दे पर बातचीत की जाएगी।”
स्थिति कब सुधरेगी?
दवा कंपनियों और विभाग के बीच संवाद शुरू होने के बाद ही स्थिति सामान्य होने के आसार हैं। माना जा रहा है कि—
-
आने वाले 10–15 दिनों में आंशिक सप्लाई शुरू हो सकती है
-
लेकिन हाई-रिस्क दवाओं पर सख्ती जारी रहेगी
यह संकट फिलहाल पूर्वांचल के मरीजों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।
