वाराणसी में तमिलनाडु प्रतिनिधि मंडल का बीएचयू दौरा: महामना का भारत रत्न और कृषि नवाचारों का अनुभव
वाराणसी: काशी में आयोजित तमिल संगमम के चौथे संस्करण में तमिलनाडु से आए प्रतिनिधि मंडल ने बीएचयू का दौरा कर भारतीय संस्कृति और कृषि नवाचारों का अनुभव किया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने भारत कला भवन में विभिन्न सभ्यताओं की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को देखा।
सांस्कृतिक अनुभव:
प्रतिनिधियों ने हड़प्पा, सिंधु और गुप्तकालीन मूर्तिकला, मृदभांड और चित्र वीथिका में मुगल शैली की पेंटिंग का अवलोकन किया। निधि वीथिका में गुप्तकालीन स्वर्ण मुद्राओं का प्रदर्शन और महामना को भारत रत्न प्रदान किए जाने की जानकारी ने प्रतिनिधियों को खासा आकर्षित किया। इसके अलावा, उन्होंने पारंपरिक तमिल नृत्य और खेलों के माध्यम से भारतीय और तमिल संस्कृति के बीच सांस्कृतिक आदान–प्रदान का आनंद लिया।
कृषि अनुभव:
प्रतिनिधि मंडल के तमिलनाडु के किसानों ने बीएचयू के कृषि अनुसंधान फार्म में कुदाल चलाकर गेहूं की बोआई का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। किसान शशिकांत राय ने प्रिसिजन फार्मिंग, ड्रोन-आधारित बुवाई और शून्य जुताई तकनीक के लाभ साझा किए।
संगोष्ठी और चर्चा:
ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में आयोजित संगोष्ठी में शस्य विज्ञान विभाग के प्रो. निखिल कुमार सिंह ने बताया कि धान की बोआई बारिश शुरू होने से ठीक पहले करने से सिंचाई और श्रम लागत में कमी आती है। उन्होंने एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) मॉडल को मजबूत करने और कृषि विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया।
विशेष संदेश:
इस कार्यक्रम ने न केवल भारतीय और तमिल संस्कृति के बीच सांस्कृतिक आदान–प्रदान को बढ़ावा दिया, बल्कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने का भी अवसर प्रदान किया।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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