लखनऊ में निजी अस्पताल की शर्मनाक करतूत: मरीज की मौत के बाद शव को लावारिस की तरह सरकारी अस्पताल में फेंका, सीसीटीवी देख दंग रह गए लोग
लखनऊ। राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। कृष्णानगर स्थित एक निजी अस्पताल में 37 वर्षीय युवक की मौत होने के बाद अस्पताल कर्मियों ने न सिर्फ परिजनों को जानकारी देने से बचा लिया, बल्कि शव को एंबुलेंस में डालकर सरकारी अस्पताल में लावारिस की तरह छोड़ आए। पूरी वारदात सीसीटीवी में कैद हो गई और अब मामला पुलिस जांच में है।
मरीज खुद चला था अस्पताल, इलाज के दौरान हो गई मौत
सरोजनीनगर निवासी कर्मवीर सिंह, जो एक निजी कंपनी में कार्यरत थे, सोमवार सुबह काम पर निकल ही रहे थे कि रास्ते में उनकी तबीयत बिगड़ गई। किसी तरह वे खुद ही एसकेडी अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने उनका तुरंत उपचार शुरू किया, लेकिन कुछ ही देर में उन्होंने दम तोड़ दिया।
सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि मौत की सूचना अस्पताल ने परिजनों को क्यों नहीं दी?
बल्कि इसके उलट, उन्होंने शव को चुपचाप हटाने का प्लान बना लिया।
एंबुलेंस में डालकर सरकारी अस्पताल पहुँचाया शव
मृतक के परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल प्रशासन ने मौत को छिपाने और जिम्मेदारी से बचने के लिए शव को अपनी एंबुलेंस में रखा और सीधे लोकबंधु अस्पताल भेज दिया।
वहां, बिना किसी सूचना और प्रक्रिया के, इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर पर शव फेंक कर कर्मचारी मौके से फरार हो गए।
सीसीटीवी ने खोला अस्पताल की लापरवाही का राज
इमरजेंसी स्टाफ ने स्ट्रेचर पर कई घंटों से पड़े शव को देखा तो अस्पताल प्रशासन को जानकारी दी। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए।
फुटेज में साफ दिखा:
-
निजी अस्पताल के दो कर्मचारी यूनिफॉर्म में आए
-
स्ट्रेचर पर शव को इमरजेंसी के बाहर छोड़कर भाग गए
-
एंबुलेंस नंबर भी साफ दिखा, जिसे बाद में ट्रेस कर लिया गया
अस्पताल स्टाफ इस कृत्य को देखकर हैरान रह गया।
चार से पांच घंटे तक लावारिस पड़ा रहा शव
लावारिस पड़े शव को देखकर स्थानीय मरीज और स्टाफ दंग रह गए। कई लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी डाल दिया।
इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया।
जेब से मिला आधार कार्ड, ऐसे हुई पहचान
कृष्णानगर पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक की जेब में रखे मोबाइल और आधार कार्ड से उसकी पहचान हुई।
परिजनों को सूचना दी गई तो परिवार पर मानो बिजली गिर गई।
कर्मवीर के घर में पत्नी अंजू, बेटा युवराज और बेटी प्रज्ञा बेसुध हालत में रोते मिले।
परिजनों का आरोप है कि—
“अगर अस्पताल जानकारी दे देता तो हम तुरंत पहुँच जाते। लेकिन उन्होंने शव को छिपाने और जिम्मेदारी से बचने के लिए लावारिस की तरह फेंक दिया।”
परिवार ने अस्पताल पर लगाया गंभीर आरोप
परिजनों ने अस्पताल पर कई आरोप लगाए—
-
मौत की जानकारी छिपाने का प्रयास
-
बिना अनुमति शव हटाना
-
एंबुलेंस से सरकारी अस्पताल में फेंकना
-
अस्पताल नियमों का घोर उल्लंघन
इसके चलते कार्रवाई की मांग की गई है।
अधिकारियों का क्या कहना है?
डॉ. संगीता गुप्ता, निदेशक, लोकबंधु अस्पताल
“फुटेज सुरक्षित है और पुलिस को दिया गया है। निजी अस्पताल के कर्मचारी शव को लावारिस छोड़कर भागे हैं।”
पीके सिंह, इंस्पेक्टर, कृष्णानगर
“परिवार शिकायत देगा तो अस्पताल पर FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।”
डॉ. एनबी सिंह, CMO
“जांच में लापरवाही साबित होने पर सख्त कार्रवाई निश्चित है।”
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, कानून का गंभीर उल्लंघन
किसी भी अस्पताल का दायित्व होता है कि—
-
मरीज की मौत पर परिजनों को तुरंत सूचना दे
-
शव को सही तरीके से हैंडल करे
-
बिना अनुमति अस्पताल परिसर से शव न हटाए
लेकिन इस मामले में सभी नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं।
IPC की कई धाराएँ जैसे—
-
201 (सबूत मिटाने का प्रयास)
-
304A (लापरवाही)
-
317 (त्यागना)
भी लागू हो सकती हैं।
समाप्ति
यह मामला शहर में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही की कड़वी तस्वीर पेश करता है। जहां इलाज के भरोसे आए लोगों को मौत के बाद भी सम्मान नहीं मिल रहा। पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है। परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।
