अमेरिकी टैरिफ का गहरा असर: भदोही के कालीन उद्योग में दो लाख श्रमिक हुए बेरोजगार, संकट में पारंपरिक बुनकर अर्थव्यवस्था
भदोही / वाराणसी हब — विशेष रिपोर्ट
भारत के पारंपरिक हस्तनिर्मित कालीन उद्योग पर अमेरिका द्वारा 50% अतिरिक्त आयात शुल्क लगाए जाने का असर अब तेज़ी से दिखाई देने लगा है। कालीन निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र भदोही-सोनभद्र-मिर्जापुर बेल्ट इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां करीब दो लाख श्रमिकों की रोज़गार चक्री ध्वस्त हो गई है।
क्यों लगा टैरिफ?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने दावा किया था कि भारतीय वस्त्र उद्योग अमेरिकी स्थानीय कंपनियों को नुकसान पहुंचा रहा है, इसलिए आयात शुल्क बढ़ाना आवश्यक था।
लेकिन निर्यातकों का मानना है कि यह फैसला राजनीतिक दबाव और व्यापार युद्ध का हिस्सा है।
निर्यात में गिरावट की ताज़ा स्थिति
| वित्त वर्ष | कुल निर्यात | अनुमानित गिरावट |
|---|---|---|
| 2024-25 | ₹17,740 करोड़ | ❌ कोई गिरावट नहीं |
| 2025-26 (वर्तमान) | अनुमानित ₹11,000–₹12,000 करोड़ | ✔️ 35–40% गिरावट |
सिर्फ पहली तिमाही में निर्यात ₹512 करोड़ ही हो सका है — यह पिछले वर्ष की तुलना में बेहद कम है।
श्रमिकों की हालत — पूरा परिवार संकट में
भदोही के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति घर 3–5 सदस्य कालीन उद्योग से जुड़े थे। काम रुकते ही परिवारों पर आर्थिक संकट गहराया है।
मोना (गुलालतारा, भदोही):
“इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि इतना लंबा समय काम बंद रहा हो। राशन चलाना मुश्किल है।”
प्रेमा देवी (रजईपुर गोहीलांव):
“पहले पूरा महीना मशीन चलती थी, अब हफ्ते में 3 दिन ही काम मिलता है।”
सैरुन निशा (घोसिया):
“घर की महिलाओं की कमाई बंद हो गई है, बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।”
छोटे निर्यातक और MSME सबसे ज्यादा प्रभावित
एकमा (All India Carpet Manufacturers Association) के अनुसार:
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भदोही में 3,200 के करीब छोटे-छोटे उत्पादन केंद्र थे — अब 90% बंद।
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कई कंपनियों पर बैंक NPA का खतरा।
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मशीनरी और कच्चे माल का स्टॉक गोदामों में फंसा।
निर्यातकों की आपूर्ति श्रृंखला ठप — कंटेनर वापस बुलाने पड़े
निर्यात संवर्धन परिषद के सदस्य पंकज बरनवाल ने बताया:
“मुंबई पोर्ट पर हजारों वर्गमीटर का माल पड़ा था। किसी खरीदार ने नहीं लिया। आखिर मजबूरी में वापस मंगाकर भारी छूट पर बेचना पड़ा।”
🇮🇳 बनाम 🇺🇸 व्यापार स्थिति
| पक्ष | स्थिति |
|---|---|
| अमेरिकी छोटे व्यापारी | महंगा होने के कारण भारतीय कालीन खरीदना बंद |
| भारतीय छोटे निर्यातक | बाजार और ऑर्डर दोनों खो दिए |
| बड़े निर्यातक | कुछ नए बड़े ग्राहक मिले, लेकिन स्थिति अनिश्चित |
सिर्फ व्यापार नहीं — संस्कृति भी संकट में
भदोही की कालीन कला:
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400 साल पुरानी
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मुगल काल से चली आ रही बुनकर परंपरा
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दुनिया के 120 देशों में निर्यात
अगर यह उद्योग बंद होता है तो:
👉 हजारों पारंपरिक डिज़ाइन, तकनीक और हस्तकला की धरोहर खतरे में पड़ जाएगी।
उद्योग की सरकार से मांग
निर्यातक और श्रमिक संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं:
✔ भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ वार्ता तेज़ की जाए
✔ अस्थायी रूप से सब्सिडी या टैक्स राहत दी जाए
✔ MSME के लिए विशेष पैकेज और सॉफ्ट लोन जारी हों
✔ नए बाजार जैसे यूरोप, कनाडा, दुबई और जापान को लक्ष्य बनाया जाए
निष्कर्ष
भदोही का कालीन उद्योग सिर्फ एक व्यवसाय नहीं — लाखों परिवारों की रोज़ी, देश की प्रतिष्ठा और भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
यदि सरकार स्तर पर समाधान नहीं निकला, तो आने वाले महीनों में यह उद्योग इतिहास बन सकता है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

