पिछड़े गांवों में विकास की सख्त जरूरत : डीएम शैलेष कुमार
ज्ञानपुर। जिले के ग्रामीण इलाकों में विकास की वास्तविक तस्वीर और उसकी जरूरतों को समझने के उद्देश्य से बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी शैलेष कुमार की अध्यक्षता में ग्रामीण विकास एवं आजीविका संवर्धन पर विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में तकनीकी संस्थानों, शोध संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर विकास कार्यों की रणनीति पर विचार किया।
बैठक में टीसीएस रिसर्च इनोवेशन की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जयश्री, वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. आनंद पांडेय, फार्फ निदेशक ऋषि राज मिश्र, और जेवियर यूनिवर्सिटी उड़ीसा के शोधार्थी शामिल रहे।
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए संयुक्त प्रयास जरूरी : डीएम
जिलाधिकारी ने कहा कि जिले के विकास के लिए तकनीकी संस्थानों, शोध संगठनों और सरकारी विभागों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि जिले के 15 चयनित पिछड़े गांवों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने पर विशेष कार्य किया जाएगा।
इन गांवों में निम्न बिंदुओं पर कार्य योजना लागू होगी—
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ग्रामीण सेवाओं का विस्तार
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स्वयं सहायता समूहों का प्रशिक्षण
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आर्थिक एवं व्यवहारिक सर्वे
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बच्चों के लिए जीवन कौशल प्रशिक्षण
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ग्रामीण आजीविका मॉडल का निर्माण
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स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्य
डीएम ने कहा कि प्राथमिक लक्ष्य महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और कौशल वृद्धि रहेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक ढांचा मजबूत हो सके।
45 दिनों का फील्ड रिसर्च, गांवों में रहकर करेंगे अध्ययन
बैठक में यह भी तय किया गया कि जेवियर विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर 45 दिनों तक ज्ञानपुर ब्लॉक के भुडकी और भिदिउरा गांवों में रहकर स्थानीय जीवनशैली, रोजगार के साधन, सामाजिक व्यवहार, स्वास्थ्य सेवाएं और ग्रामीण बाधाओं का अध्ययन करेंगे।
शोध पूरा होने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर योजनाओं का क्रियान्वयन होगा।
संस्थाओं ने दिया सहयोग का आश्वासन
फार्फ निदेशक ऋषि राज मिश्र ने बताया कि जल्द ही संस्था की टीम टीसीएस और जेवियर यूनिवर्सिटी की रिसर्च यूनिट के साथ फील्ड में उतरकर कार्य शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि यह मॉडल जिले के ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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