जजों के जाली साइन से करोड़ों की ठगी! सुप्रीम कोर्ट ने कहा – “ये तो न्यायपालिका पर हमला है”, गृह मंत्रालय और CBI से मांगा देशव्यापी ऐक्शन प्लान
नई दिल्ली | ब्यूरो रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों और डिजिटल गिरफ्तारी (Digital Arrest) जैसे नए ठगी के तरीकों पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि अब अपराधी न सिर्फ आम जनता को ठग रहे हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के जाली हस्ताक्षर बनाकर न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर हमला कर रहे हैं।
शीर्ष अदालत ने गृह मंत्रालय (MHA) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कहा कि ऐसे अपराधों पर नियंत्रण और इन गिरोहों के सफाए के लिए देशव्यापी ऐक्शन प्लान पेश करें।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: “ज्यूडिशरी की नींव हिलाने की कोशिश”
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा –
“जजों के जाली साइन और आदेश तैयार करना केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था में जनता के विश्वास की नींव पर सीधा हमला है। यह संस्था की गरिमा और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर प्रहार है।”
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों को साधारण साइबर अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इन्हें राष्ट्रीय स्तर के गंभीर आपराधिक षड्यंत्र की तरह लिया जाना चाहिए।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी का तरीका?
सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आया यह मामला ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नए साइबर फ्रॉड मॉडल से जुड़ा है। इस ठगी में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, या कोर्ट अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर “गिरफ्तार” करने की धमकी देते हैं।
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वीडियो कॉल पर जजों के नकली ऑर्डर और कोर्ट सील दिखाते हैं।
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लोगों को डराकर कहते हैं कि उनके खिलाफ केस दर्ज है।
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“केस खत्म कराने” या “रिहाई” के नाम पर बड़ी रकम ठग लेते हैं।
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अधिकतर मामलों में वरिष्ठ नागरिक और अकेले रहने वाले लोग निशाना बनते हैं।
अंबाला के दंपती से करोड़ों की ठगी
यह मामला उस वक्त सामने आया जब अंबाला के 70 वर्षीय दंपती ने शिकायत दर्ज कराई कि ठगों ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट का फर्जी ऑर्डर दिखाकर ₹1 करोड़ से अधिक की रकम देने के लिए मजबूर किया।
पीड़ितों के मुताबिक, अपराधियों ने व्हाट्सऐप और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए खुद को केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए कहा —
“हम यह देखकर स्तब्ध हैं कि अपराधियों ने सुप्रीम कोर्ट के नाम, मुहर और न्यायाधीशों के हस्ताक्षर तक की फर्जी नकल कर ली।”
कोर्ट का निर्देश: समन्वित जांच हो, केवल लोकल नहीं
पीठ ने कहा कि यदि यह अपराध एक जिले या राज्य तक सीमित होता तो अंबाला साइबर सेल को जांच में तेजी का निर्देश दिया जाता, लेकिन चूंकि यह नेटवर्क देशभर में फैला दिख रहा है, इसलिए राज्य पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और साइबर क्राइम यूनिट्स के बीच संयुक्त जांच तंत्र की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केवल तकनीकी जांच नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे साइबर रैकेट्स की भी पड़ताल जरूरी है।
अटॉर्नी जनरल से सहयोग की मांग
अदालत ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से इस मामले में अदालत की सहायता करने का अनुरोध किया है। कहा गया कि इस ठगी के जाल में कई देशों के फर्जी कॉल सेंटर, बैंक अकाउंट और क्रिप्टो चैनल्स जुड़े हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सार
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न्यायिक आदेशों की जालसाजी सामान्य अपराध नहीं है।
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जनता के विश्वास को कमजोर करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी।
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वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाले गिरोहों पर तुरंत कार्रवाई हो।
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केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित जांच जरूरी।
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डिजिटल सुरक्षा और साइबर साक्षरता पर व्यापक अभियान चलाया जाए।
देश में बढ़ रहे साइबर फ्रॉड केस
भारत में 2024 के बाद से डिजिटल ठगी के मामलों में करीब 300% की वृद्धि दर्ज की गई है।
NCRB के अनुसार, हर दिन औसतन 4,500 से अधिक साइबर शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। इनमें सबसे अधिक मामले बैंकिंग धोखाधड़ी, सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग और डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़े हैं।
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश
“यह अदालत यह स्पष्ट करना चाहती है कि न्यायपालिका के नाम का दुरुपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति या गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे अपराधी न केवल कानून का उल्लंघन करते हैं, बल्कि जनता के विश्वास से भी खिलवाड़ करते हैं।”
Author: Bharat Kranti News
Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

