मैनें ये नहीं कहा इसे मुझे दे दो” — नोबेल शांति पुरस्कार पर ट्रंप का विवादित बयान, मचाडो की टीम ने दी सफाई
प्रकाशन तिथि: 11 अक्टूबर 2025
लेखक: भारत क्रांति न्यूज़ डेस्क
मुख्य समाचार:
2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर अपना रिएक्शन देते हुए कहा कि मचाडो ने उन्हें फोन कर बताया कि “वह यह पुरस्कार उनके सम्मान में स्वीकार कर रही हैं, क्योंकि असल हकदार ट्रंप हैं।”
ट्रंप ने फ्लोरिडा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा —
“मैंने वेनेजुएला के लोगों और मचाडो की लोकतंत्र की लड़ाई में बहुत मदद की थी। जब उन्हें नोबेल मिला, तो उन्होंने मुझे फोन करके कहा, ‘मिस्टर ट्रंप, मैं ये अवॉर्ड आपके नाम करती हूं।’ लेकिन अब लोग कह रहे हैं कि मैंने यह बात खुद बनाई है — मैंने ऐसा नहीं कहा, बस सच बताया है।”
मचाडो कैंप ने ट्रंप के दावे को नकारा
मचाडो की टीम ने ट्रंप के इस बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसे भ्रामक और राजनीतिक बयानबाज़ी बताया।
उनके प्रवक्ता ने कहा,
“मारिया कोरिना मचाडो ने नोबेल पुरस्कार किसी भी व्यक्ति को समर्पित नहीं किया है। यह पुरस्कार वेनेजुएला के लोकतंत्र और उन सभी नागरिकों को समर्पित है जो वर्षों से स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
ट्रंप के बयान के बाद ट्विटर (अब एक्स) पर #TrumpNobel और #MariaCorinaMachado जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
कई उपयोगकर्ताओं ने ट्रंप के इस दावे का मज़ाक उड़ाया।
एक यूज़र ने लिखा — “ट्रंप हर बार वही करते हैं — जहां कैमरा, वहीं बयान।”
वहीं, कुछ समर्थकों ने कहा कि “ट्रंप ने मचाडो को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।”
मचाडो के संघर्ष की पृष्ठभूमि
मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता हैं, जो राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की नीतियों के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रही हैं।
उन्होंने वर्षों तक शांतिपूर्ण तरीकों से लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी।
नोबेल समिति ने उन्हें “तानाशाही के खिलाफ बिना हिंसा के संघर्ष करने वाली प्रेरणादायक महिला” के रूप में सम्मानित किया।
अमेरिकी राजनीति पर असर
अमेरिकी मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान आने वाले राष्ट्रपति चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया है।
उनका मकसद अपनी विदेश नीति को एक बार फिर चर्चा में लाना और समर्थकों के बीच “वैश्विक नेता” की छवि को मजबूत करना है।
निष्कर्ष:
जहां ट्रंप अपने विवादित बयानों से एक बार फिर सुर्खियों में हैं, वहीं मारिया कोरिना मचाडो ने अपने शांत और दृढ़ रुख से लोकतंत्र के वैश्विक प्रतीक के रूप में अपनी पहचान और मजबूत की है।
Author: Bharat Kranti News
Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.
