चुनावी तैयारी के बीच सामाजिक न्याय के प्रतीकों पर फोकस, जिले में 30 स्मारकों का होगा विकास
ज्ञानपुर। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने दलित और सामाजिक न्याय से जुड़े समुदायों को साधने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जिले में महापुरुषों की प्रतिमाओं और स्मारकों के विकास की योजना शुरू की है। डॉ. बी.आर. आंबेडकर मूर्ति विकास योजना के तहत जिले के विभिन्न हिस्सों में स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा।
योजना के अनुसार जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्रों में 10-10 और संसदीय क्षेत्र में 10 स्मारकों को चिन्हित कर उनका विकास कराया जाएगा। प्रत्येक स्मारक पर करीब 10 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इस तरह जिले में कुल 30 स्मारकों के विकास पर लगभग तीन करोड़ रुपये की धनराशि खर्च होगी।
800 से अधिक प्रतिमाएं, 700 सिर्फ आंबेडकर की
जिले के सात नगर निकायों और 546 ग्राम पंचायतों में सामाजिक न्याय से जुड़े महापुरुषों की 800 से अधिक प्रतिमाएं स्थापित हैं। इनमें सबसे अधिक करीब 700 प्रतिमाएं बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में दलित बाहुल्य बस्तियों में आंबेडकर की प्रतिमाएं सामाजिक पहचान और सम्मान का प्रतीक मानी जाती हैं।
इसके अलावा संत रविदास, कबीर दास, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाएं भी कई स्थानों पर स्थापित हैं। औराई विधानसभा क्षेत्र में संत रविदास की प्रतिमाओं की संख्या अधिक बताई जा रही है, जबकि सीतामढ़ी क्षेत्र में महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा प्रमुख रूप से स्थापित है।
स्मारकों पर बनेंगे बाउंड्रीवाल और लगेंगी लाइटें
योजना के तहत चयनित प्रतिमाओं और स्मारकों के आसपास बाउंड्रीवाल, छत्र निर्माण, इंटरलॉकिंग, हरियाली और हाईमास्ट या अन्य प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। कई स्थानों पर बैठने की व्यवस्था और सुंदरीकरण का कार्य भी प्रस्तावित है। प्रशासन का दावा है कि इससे स्मारकों की सुरक्षा बढ़ेगी और आसपास के क्षेत्रों का विकास होगा।
जनप्रतिनिधियों से मांगे गए प्रस्ताव
समाज कल्याण विभाग की ओर से योजना के लिए विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। प्रस्ताव मिलने के बाद चिन्हित प्रतिमाओं की सूची तैयार कर विकास कार्य शुरू कराया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक प्राथमिकता उन स्थानों को दी जाएगी जहां प्रतिमाएं जर्जर अवस्था में हैं या वहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
सामाजिक और राजनीतिक नजरिए से अहम योजना
राजनीतिक जानकार इस योजना को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि सामाजिक न्याय और दलित महापुरुषों से जुड़े प्रतीकों के विकास के जरिए सरकार दलित वर्ग के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रही है। ग्रामीण इलाकों में महापुरुषों की प्रतिमाएं सामाजिक और राजनीतिक रूप से काफी प्रभाव रखती हैं।
वर्जन
“तीनों विधानसभा क्षेत्रों में 10-10 स्मारकों का विकास कराया जाएगा। जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं। प्रस्ताव मिलने के बाद चयनित प्रतिमाओं का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा।”
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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