वीजा मुक्त यात्रा से कालीन उद्योग को मिलेगा नया विस्तार
भदोही।
भारत और जर्मनी के बीच वीजा मुक्त यात्रा को लेकर हुए समझौते को कालीन उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। विश्वविख्यात भदोही–मिर्जापुर कालीन बेल्ट के निर्यातकों को इससे सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यह फैसला भारतीय कालीनों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और मजबूती देगा।
अब तक जर्मनी सहित यूरोपीय देशों की यात्रा के लिए वीजा प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली थी। कई बार अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और व्यापारिक बैठकों में भाग लेने के अवसर केवल वीजा देरी के कारण हाथ से निकल जाते थे। वीजा से छूट मिलने के बाद अब भारतीय कालीन कारोबारी बिना किसी बाधा के जर्मनी जाकर नए खरीदारों से सीधे संपर्क स्थापित कर सकेंगे।
जर्मनी भारतीय कालीनों का प्रमुख बाजार
जर्मनी लंबे समय से भारतीय कालीनों का बड़ा आयातक रहा है। अमेरिका के बाद जर्मनी भारतीय कालीनों का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। हाथ से बने, पारंपरिक डिजाइन और टिकाऊ गुणवत्ता वाले भारतीय कालीनों की यूरोप में विशेष मांग बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय एक्सपो से मिलेगा कारोबार को बढ़ावा
जर्मनी में आयोजित होने वाले डोमोटेक्स और हाइमटेक्सटिल जैसे अंतरराष्ट्रीय टेक्सटाइल एक्सपो भारतीय कालीन निर्यातकों के लिए सबसे अहम मंच माने जाते हैं। वर्ष 2026 में होने वाले इन आयोजनों में बड़ी संख्या में भारतीय कारोबारी भाग ले रहे हैं। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से नए ऑर्डर मिलने के साथ-साथ दीर्घकालिक व्यापारिक समझौते भी तय होते हैं।
अमेरिकी टैरिफ के बाद यूरोप बना प्राथमिक बाजार
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद कालीन निर्यातकों ने वैकल्पिक बाजारों की तलाश तेज कर दी है। इस स्थिति में जर्मनी और अन्य यूरोपीय देश भारतीय निर्यातकों की प्राथमिकता बनते जा रहे हैं। वीजा मुक्त यात्रा ने इस बदलाव को और सहज बना दिया है।
निर्यात आंकड़े और उद्योग की उम्मीदें
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 में भारत से जर्मनी को लगभग 1053 करोड़ रुपये मूल्य के कालीनों का निर्यात किया गया है। आने वाले वर्षों में इस आंकड़े में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-जर्मनी के बीच मजबूत होते व्यापारिक संबंध, नीतिगत समर्थन और वीजा संबंधी सहूलियत से कालीन उद्योग को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि भदोही क्षेत्र के हजारों कारीगरों को रोजगार और बेहतर आय के अवसर भी प्राप्त होंगे।
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News
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