हिजाब पहनना या न पहनना महिलाओं का निजी फैसला, बहस का विषय नहीं: इकरा हसन

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हिजाब पर बहस नहीं, असली मुद्दों पर हो फोकस: सांसद इकरा हसन

डेस्क/कैराना:
कैराना से सांसद इकरा हसन ने हिजाब को लेकर चल रही बहस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह महिलाओं की निजी स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है और इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देना सही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला पर हिजाब पहनने या न पहनने का दबाव लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में सांसद ने कहा कि देश आज शिक्षा, रोजगार, महंगाई और महिला सुरक्षा जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में पहनावे को लेकर बहस खड़ी करना प्राथमिकताओं से भटकाने जैसा है।

लोकतंत्र में चुनाव की आज़ादी जरूरी
इकरा हसन ने कहा, “लोकतंत्र का मतलब है कि हर नागरिक—खासतौर पर महिलाएं—अपने फैसले खुद ले सकें। किसी भी तरह का दबाव, चाहे वह सामाजिक हो या राजनीतिक, स्वीकार्य नहीं है।”

अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का जिक्र
उन्होंने कहा कि कई देशों में इस तरह के मुद्दों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दायरे में रखा जाता है और सरकारें वास्तविक समस्याओं पर काम करती हैं। भारत में भी बहस का केंद्र जनकल्याण और विकास होना चाहिए।

संस्कृति बनाम मजबूरी
सांसद ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सिर ढकना कई समुदायों में सांस्कृतिक परंपरा है, लेकिन परंपरा और मजबूरी के बीच फर्क समझना जरूरी है। “परंपराएं सम्मान से निभाई जाती हैं, थोपकर नहीं,” उन्होंने कहा।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
सांसद के बयान के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे महिलाओं की आज़ादी के समर्थन में मजबूत बयान बताया, जबकि कुछ ने इस पर असहमति भी जताई।

अंत में स्पष्ट संदेश
इकरा हसन ने दो टूक कहा कि समाज और राजनीति को महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और सशक्तिकरण पर एकजुट होकर काम करना चाहिए। “पहनावे की बहस से आगे बढ़कर अगर हम अवसरों की बात करेंगे, तभी वास्तविक बदलाव संभव है,” उन्होंने कहा।

Ashu Jha : Bharat Kranti News
Author: Ashu Jha : Bharat Kranti News

Ashu Jha एडिटर, भारत क्रांति न्यूज़ Ashu Jha भारत क्रांति न्यूज़ के एडिटर हैं और निष्पक्ष, सटीक व ज़मीनी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए टीम का नेतृत्व करते हैं। उनका ध्यान जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों के असर और सामाजिक सरोकारों पर रहता है। Ashu Jha का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है।

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