मरीजों से ज्यादा अस्पतालों को बीमारी!
ज्ञानपुर में जन आरोग्य मेले ने खोली स्वास्थ्य विभाग की पोल, कीचड़ भरे रास्ते और गायब डॉक्टर बने परेशानी का सबब
ज्ञानपुर, भदोही | संवाददाता
रविवार को जिले के 17 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का उद्देश्य था — ग्रामीणों को उनके दरवाजे पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना। लेकिन हकीकत कुछ और ही दिखी।
कई अस्पतालों में डॉक्टर समय से नहीं पहुंचे, तो कई जगहों पर अस्पताल तक जाने वाला रास्ता दलदल में तब्दील था। नतीजा यह कि मरीजों से ज्यादा परेशानी खुद अस्पतालों को झेलनी पड़ी।
कुल 2310 मरीज पहुंचे, अधिकतर मौसमी बीमारियों से पीड़ित
मेले में कुल 2310 मरीजों ने पंजीकरण कराया। इनमें ज्यादातर लोग सर्दी, जुकाम, वायरल बुखार जैसी मौसमी बीमारियों से ग्रसित पाए गए। स्वास्थ्य कर्मियों ने सभी मरीजों की जांच कर आवश्यक दवाएं वितरित कीं।
आयुष और एलोपैथिक विभाग के संयुक्त प्रयास से दवा वितरण का कार्य चलता रहा, मगर डॉक्टरों की अनुपस्थिति और अव्यवस्था ने स्वास्थ्य मेले के उद्देश्य पर सवाल खड़े कर दिए।
आधे से ज्यादा पीएचसी पर डॉक्टर देर से पहुंचे
कटरा, हरिहरपुर, लालानगर, जयरामपुर, महजूदा और सेमराध जैसे केंद्रों पर मरीज समय पर पहुंच गए, लेकिन डॉक्टरों को आने में आधा घंटा या उससे अधिक की देरी हुई।
इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीजों को संभाला, परंतु जांच और परामर्श का कार्य डॉक्टरों के आने तक ठप पड़ा रहा।
दुर्गागंज पीएचसी तक पहुंचना चुनौती
दुर्गागंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल सबसे ज्यादा चिंताजनक रहा। केंद्र तक पहुंचने वाला करीब 300 मीटर लंबा रास्ता कीचड़ और गड्ढों से भरा हुआ है।
पिछले 15 वर्षों से इस मार्ग की मरम्मत नहीं हुई। कई बार एंबुलेंस यहां कीचड़ में फंस जाती है और मरीजों को फिसल कर चोट तक लग जाती है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि समस्या की शिकायत कई बार की गई, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर समाधान नहीं हुआ।
कुछ जगह व्यवस्था रही संतोषजनक
गिर्दबड़गांव पीएचसी पर स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर दिखी। यहां तीनों शाखाओं — एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक — से डॉक्टर मौजूद रहे।
डॉ. गजेंद्र सिंह, डॉ. अरुण सिंह और अन्य चिकित्सक सुबह से लगातार मरीजों को देख रहे थे।
डॉ. अरुण सिंह ने बताया कि “सुबह से मरीजों की भीड़ लगी हुई है, दोपहर तक 55 मरीजों का उपचार किया जा चुका है।”
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
जन आरोग्य मेले का मकसद लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देना था, लेकिन जिन जगहों पर डॉक्टर ही समय पर न पहुंचें और सड़कें मरीजों के लिए मुसीबत बन जाएं, वहां सवाल उठना लाजमी है।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन से व्यवस्था सुधारने की मांग की है।
निष्कर्ष
भदोही जिले का यह मेला स्वास्थ्य सेवाओं के “सुधार अभियान” से ज्यादा व्यवस्थाओं की बीमारी का आईना साबित हुआ।
जनता को राहत देने के बजाय, मेले ने दिखा दिया कि अस्पतालों को खुद इलाज की जरूरत है।
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Author: Bharat Kranti News
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