उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं का महाआंदोलन, सरकार के खिलाफ बार काउंसिल का बड़ा ऐलान
मुख्य संपादक: शिवशंकर दुबे, भारत क्रांति न्यूज
लखनऊ, 19 फरवरी 2025
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा उबाल आने वाला है। अधिवक्ताओं के स्वायत्त अधिकारों को सीमित करने के प्रयास के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। काउंसिल के अध्यक्ष मधुसूदन त्रिपाठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार एडवोकेट्स एक्ट 1961 में संशोधन कर अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता पर कुठाराघात करना चाहती है। अगर सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती, तो प्रदेशभर के अधिवक्ता 21 फरवरी 2025 को बड़ा प्रदर्शन करेंगे और 25 फरवरी 2025 को न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
क्या है विवाद?
बार काउंसिल के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारें लगातार स्वायत्त संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। ठीक उसी तरह, जैसे चुनाव आयोग, सूचना आयोग, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग को कमजोर किया गया, अब अधिवक्ता समाज की स्वतंत्रता को भी समाप्त करने की साजिश रची जा रही है।
त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि सरकार बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की स्वायत्तता खत्म कर अधिवक्ताओं पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। यह केवल अधिवक्ताओं पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान पर भी सीधा हमला है।
कब और कैसे होगा विरोध?
बार काउंसिल ने दो चरणों में विरोध की घोषणा की है:
- 21 फरवरी 2025: प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान, जहां अधिवक्ता अदालतों से बाहर रहकर सरकार के खिलाफ विरोध जताएंगे।
- 25 फरवरी 2025: न्यायिक कार्यों का बहिष्कार, जिससे अदालतों में कामकाज ठप हो सकता है।
त्रिपाठी ने कहा कि अधिवक्ताओं के हक़ की यह लड़ाई लंबी चल सकती है और अगर सरकार नहीं झुकी, तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।

बार काउंसिल का रुख और अधिवक्ताओं की चेतावनी
बार काउंसिल की आपात बैठक 18 फरवरी 2025 को हुई थी, जिसमें यह सर्वसम्मति से तय किया गया कि इस बिल का पुरजोर विरोध होगा। वकीलों की मांगें स्पष्ट हैं:
- एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल लागू हो
- वरिष्ठ अधिवक्ताओं को 70 वर्ष की आयु के बाद 20,000 रुपये मासिक पेंशन मिले
- सरकार अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता पर हमला बंद करे
मधुसूदन त्रिपाठी ने चेतावनी दी, “अधिवक्ताओं का समाज हमेशा से न्याय और अधिकारों की रक्षा करता आया है। अगर सरकार अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता खत्म करना चाहती है, तो हम सड़क से संसद तक संघर्ष करेंगे।”
दिल्ली तक पहुंचेगा यह मामला
सूत्रों के मुताबिक, 23 फरवरी 2025 को दिल्ली में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की बैठक होगी, जिसमें सभी राज्य बार काउंसिल के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। वहां इस मसले पर निर्णय लिया जाएगा कि क्या यह आंदोलन देशव्यापी रूप लेगा।
सरकार का पक्ष क्या है?
अब सवाल उठता है कि क्या सरकार इस विरोध के बाद अपने कदम पीछे खींचेगी? फिलहाल, राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अगर अधिवक्ताओं का यह विरोध तेज़ होता है, तो सरकार को सफाई देनी पड़ सकती है।
भारत क्रांति न्यूज इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नज़र बनाए हुए है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार यह बिल वापस लेती है या अधिवक्ताओं का यह आंदोलन और तेज़ होगा?
(विशेष रिपोर्ट: शिवशंकर दुबे, मुख्य संपादक, भारत क्रांति न्यूज)
Author: Bharat Kranti News
Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.



