48 साल बाद लौटा खोया बेटा, मां की ममता देख नम हो जाएंगी आंखें

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48 साल बाद मां-बेटे के भावुक मिलन ने पूरे गांव को रुलाया

भारत क्रांति न्यूज़

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से एक ऐसी भावुक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। करीब 48 साल पहले घर से लापता हुआ बेटा जब साधु बनकर अपने गांव लौटा, तो उसकी वृद्ध मां ने उसे चेहरे से नहीं, बल्कि उसकी आवाज से पहचान लिया। मां-बेटे के इस भावुक मिलन का वीडियो और तस्वीरें अब पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

जानकारी के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले के एक गांव निवासी बुद्धि बल्लभ उपाध्याय लगभग 15 वर्ष की उम्र में घर छोड़कर चले गए थे। परिवार ने वर्षों तक उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतता गया, परिवार के सदस्य उम्रदराज होते गए और बेटे के लौटने की उम्मीद भी धीरे-धीरे धुंधली पड़ने लगी।

बताया जाता है कि घर छोड़ने के बाद बुद्धि बल्लभ ने देश के विभिन्न हिस्सों में जीवन बिताया और बाद में आध्यात्मिक मार्ग अपनाकर नाथ संप्रदाय के साधु बन गए। संन्यास लेने के बाद उन्हें “बुद्धनाथ” के नाम से जाना जाने लगा।

4 जून 2026 को वह साधु के वेश में अपने पैतृक गांव पहुंचे। परंपरा के अनुसार उन्होंने घर-घर जाकर भिक्षा मांगना शुरू किया। जब वह अपने ही घर के सामने पहुंचे और भिक्षा की पुकार लगाई, तब घर के भीतर मौजूद उनकी वृद्ध मां नंदी देवी ने वह आवाज सुनी।

सालों का लंबा अंतराल, बदला हुआ चेहरा, सफेद दाढ़ी और साधु का वेश—इन सबके बावजूद मां अपने बेटे की आवाज नहीं भूली थीं। जैसे ही वह बाहर आईं, कुछ पल तक साधु को देखती रहीं और फिर भावुक होकर बोलीं, “तू मेरा बेटा है ना?”

इसके बाद जो हुआ, उसने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। बेटा मां के चरणों में गिर पड़ा और मां ने उसे सीने से लगा लिया। दोनों की आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली। गांव के लोग भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि दशकों पहले खोया हुआ बेटा एक दिन अचानक उनके सामने खड़ा होगा। दुखद बात यह रही कि बेटे की राह देखते-देखते उसके पिता का निधन हो चुका है और वह इस ऐतिहासिक मिलन को देखने के लिए जीवित नहीं रहे।

बताया जा रहा है कि बुद्धनाथ अपने गुरु की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए गांव लौटे थे। उनके गुरु ने उन्हें आदेश दिया था कि वह अपनी मां के हाथों से भिक्षा ग्रहण करें। इसी आदेश का पालन करने के लिए वह वर्षों बाद अपने घर पहुंचे।

हालांकि बेटे की घर वापसी ने परिवार को अपार खुशी दी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका जीवन अब संन्यास और आध्यात्मिक साधना को समर्पित है। इसलिए वह अपनी आध्यात्मिक यात्रा जारी रखेंगे।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि समय चाहे कितना भी बीत जाए, एक मां अपने बच्चे को कभी नहीं भूलती। चेहरा बदल सकता है, उम्र बदल सकती है, लेकिन मां और संतान के बीच का रिश्ता कभी नहीं बदलता।

भारत क्रांति न्यूज़ की विशेष टिप्पणी

48 साल का इंतजार, हजारों अधूरी रातें, अनगिनत आंसू और एक मां की अटूट उम्मीद… आखिरकार उस दिन खत्म हुई जब दरवाजे पर खड़े साधु की आवाज में उसे अपना खोया हुआ बेटा सुनाई दिया। यह सिर्फ एक पुनर्मिलन नहीं, बल्कि मां की ममता की सबसे बड़ी जीत है।

Author: Bharat Kranti News

Anil Mishra CEO & Founder, Bharat Kranti News Anil Mishra is the CEO and Founder of Bharat Kranti News, a platform dedicated to fearless and unbiased journalism. With a mission to highlight grassroots issues and promote truth in media, he has built Bharat Kranti News into a trusted source of authentic and people-centric reporting across India.

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